उदयपुर में सोमवार शाम 6:30 बजे से रात तक शुभ मुहूर्त में अलग-अलग जगह होलिका दहन किया गया। शहर से लेकर गांव तक होलिका दहन को लेकर खासा उत्साह था। शहर से लेकर गांवों में परम्परागत रूप से होलिका दहन से पहले लोगों ने पूजा-अर्चना के बाद विधि-विधान को पूरा किया। महिलाओं ने पूजा की और परिवार के साथ अग्नि की परिक्रमा की। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और ढोल की धुन पर लोग झूमते नजर आए। भींडर में ढोल की थाप के साथ होलिका दहन किया गया। उदयपुर जिले के बंबोरा कस्बे के प्रताप चौक पर रावली होली का विधि-विधान से 11 फीट लंबी होली का दहन शाम 6:30 बजे किया गया। इस अवसर पर प्रद्युम्न सिंह कृष्णावत, मदन सिंह कृष्णावत सहित सर्व समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने एकजुट होकर होलिका दहन में भाग लिया।
राज्यपाल पहुंचे सुभाष चौक
उदयपुर शहर के सुभाष नवयुवक मंडल की ओर से सुभाष चौराहा पर इस बार 52 फीट ऊंची विशेष होलिका का दहन किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए और उसके बाद होलिका दहन की गई। कार्यक्रम में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया, विधायक ताराचंद जैन,
फूलसिंह मीणा, नारायण दास महाराज, महंत इंद्रदेव दास, आईजी गौरव श्रीवास्तव, जिला कलेक्टर नमित मेहता, एसपी योगेश गोयल आदि मौजूद रहे। स्वागत संयोजक अतुल चंडालिया और कमलेश जावरिया ने किया। सिटी पैलेस के माणक चौक में होलिका दहन किया
सिटी पैलेस उदयपुर में डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ राजसी वेशभूषा में अपने लवाजमे के साथ माणक चौक में आए। वहां पैलेस गार्ड द्वारा सल्यूट प्रदान किया गया। वैदिक रीति से सम्पन्न होलिका पूजन में डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने विधिवत पूजा-अर्चना कर होलिका को ओढ़नी ओढ़ाई तथा पुष्पमाला, श्रीफल आदि अर्पित किए। तत्पश्चात् राजपरिवार के सदस्यों के साथ परिक्रमा कर विधिवत अग्नि प्रज्वलित की। इस पावन अवसर पर मेवाड़ क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों एवं मठों से पधारे साधु-संतों और महंतों का विशेष सम्मान किया गया। उनका माल्यार्पण कर श्रीफल आदि भेंट किए गए। संत-महंतों ने मेवाड़ की सुख-समृद्धि और उन्नति के लिए आशीर्वचन प्रदान करते हुए “आसका” प्रदान की। महोत्सव के दौरान पारम्परिक ‘गैर’ नृत्य का आयोजन हुआ, जिसमें लोक कलाकारों ने मेवाड़ी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की और फुल फाग खेली गई। करकेला भैरव की होली में 8 हजार से ज्यादा लोग जुटे पहाड़ी पर उदयपुर और सलूम्बर जिले की सीमा पर स्थित रजोल एवं धनकावाडा में संयुक्त रूप से करकेला धाम में होलिका दहन को देखने के लिए करीब 8 हजार से ज्यादा लोग पहाड़ी पर चढ़े। सेवानिवृत अध्यापक नरेंद्र कुमार पंड्या ने बताया कि करकेला भैरव की होली उदयपुर,सलूंबर जिले के साथ ही डूंगरपुर जिले में भी विख्यात है और बेहद पवित्र मानी जाती है। समुद्रतल से करीब 1 हज़ार मीटर ऊंचे इस पर्वत पर सबसे पहले गोधूलि वेला में होलिका दहन किया जाता है। खास बात यह है कि इस होलिका दहन के बाद ही आसपास क्षेत्र के गांवों और कस्बों में होलिका दहन की जाती है। वे बताते है कि मान्यता है कि इस स्थान पर होली के अवसर पर लोग संतान प्राप्ति की मन्नत अपने बच्चों को ढूंढ कर पूरी करते है। इस पहाड़ का कुछ हिस्सा उदयपुर तो कुछ सलूंबर जिले में आता है। तस्वीरों में देखे उदयपुर की होली…


