मेवाड़ के प्रसिद्ध धाम चारभुजानाथ मंदिर में आज से 16 दिवसीय फागोत्सव की विधिवत शुरुआत हो गई। सुबह 6 बजे झूले के दर्शन के साथ भक्तों ने ठाकुरजी की अलौकिक झांकी के दर्शन किए। आगामी 16 दिनों तक मंदिर परिसर में गुलाल उड़ेगी और भक्त तथा भगवान के बीच रंग-भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। मेवाड़ में जहां एक ओर श्रीनाथजी मंदिर सहित पुष्टिमार्गीय मंदिरों में होली के अगले दिन डोलोत्सव के साथ फागोत्सव का समापन हो जाता है, वहीं चारभुजानाथ मंदिर में होली दहन के बाद फागोत्सव का शुभारंभ होता है। यहां यह उत्सव पूरे 16 दिनों तक रंग, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है। 2 मार्च की शाम होलिका दहन के बाद 3 मार्च मंगलवार से फागोत्सव प्रारंभ हुआ, जो 18 मार्च तक जारी रहेगा। इस दौरान प्रतिदिन सेवा और दर्शन का विशेष क्रम निर्धारित किया गया है। चंद्र ग्रहण के कारण बदला दर्शन समय चंद्र ग्रहण के कारण इस बार दर्शन और फागोत्सव के समय में परिवर्तन किया गया। प्रथम दर्शन सुबह 3 बजे हुए, मंगला आरती 3:15 बजे, राजभोग 5 बजे और सुबह 6 बजे झूले के दर्शन के साथ फागोत्सव की शुरुआत हुई। इसके बाद कसार आरती सुबह 9 बजे और संध्या आरती 9:30 बजे संपन्न हुई। सुबह 9:45 बजे से सायं 6:45 बजे तक ग्रहणकालीन दर्शन हुए। 4 मार्च से नियमित क्रम 4 मार्च से 18 मार्च तक फागोत्सव प्रतिवर्ष की भांति नियमित समयानुसार आयोजित होगा। सुबह 5 बजे मंगला झांकी के साथ मंदिर के पट खुलेंगे। मंगला आरती के बाद राज श्रृंगार की तैयारी होगी और लगभग 8:30 बजे राज श्रृंगार दर्शन प्रारंभ होंगे। दोपहर 12:30 बजे राजभोग आरती होगी। दोपहर 2:30 बजे पुजारी भीम कुंड की बावड़ी से सोने के कलश में जल भरकर लाते हैं, जिसे भगवान को अर्पित किया जाता है। इस दौरान देवस्थान विभाग के गार्ड भी साथ रहते हैं। सोने के झूले में विराजेंगे ठाकुरजी, गूंजेंगे ढोल-नगाड़े जल अर्पण के बाद ठाकुरजी को निज मंदिर से बाहर लाकर सोने के झूले में विराजित किया जाता है। मंदिर की तोप से सलामी दी जाती है और ढोल-नगाड़ों की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो उठता है। सोने के झूले के दोनों ओर पुजारी कतारबद्ध खड़े होकर होली के हरजस गाते हैं। श्रद्धालु भक्ति भाव से ठाकुरजी के साथ होली खेलते हैं। शाम करीब 4 बजे अमल का भोग लगाया जाता है। झूला दर्शन लगभग साढ़े 5 बजे तक होते हैं, इसके बाद ठाकुरजी पुनः गर्भगृह में पधारते हैं। इसके बाद कसार आरती और आधे घंटे पश्चात संध्या आरती होती है। संध्या आरती के बाद शयन श्रृंगार की तैयारी की जाती है। सायं 7 बजे से 8:30 बजे तक परिक्रमा चौक में पुजारी परिवार पारंपरिक वेशभूषा में गेर नृत्य प्रस्तुत करते हैं, जिसमें बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक भाग लेते हैं। रात 8:30 बजे शयन दर्शन खुलते हैं और 10 बजे शयन आरती के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। गढ़बोर में आयोजित यह 16 दिवसीय फागोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और मेवाड़ी संस्कृति का जीवंत उत्सव बन जाता है।


