अजमेर शहर की सड़कों पर तेज रफ्तार से वाहन दौड़ाने वालों पर अब तकनीकी शिकंजा कसेगा। अभी तक दिन में इंटरसेप्टर वाहनों से चालान काटे जाते हैं, लेकिन रात में यह व्यवस्था प्रभावी नहीं रहती। नतीजतन कई सड़कें रेस ट्रैक बन जाती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने पुलिस मुख्यालय से 45 एआई आधारित इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) कैमरे मांगे हैं। ये कैमरे अभय कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जुड़कर ऑटोमैटिक स्पीड वायलेशन सिस्टम के जरिए 24 घंटे रिकॉर्डिंग करेंगे। कैमरे वाहन की गति, नंबर प्लेट और उल्लंघन को रियल-टाइम में कैप्चर करेंगे। ओवरस्पीड वाहन की पहचान होते ही नंबर के आधार पर स्वचालित ई-चालान सीधे वाहन मालिक के पते पर भेजा जाएगा। गंभीर मामलों में एफआईआर भी दर्ज होगी। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार रात 12 से तड़के 4 बजे के बीच सर्वाधिक ओवरस्पीडिंग होती है। इस दौरान निगरानी सीमित रहती है। खाली सड़कें देखकर चालक तेज रफ्तार पकड़ लेते हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है। रात में होने वाले हादसों में करीब आधे ओवर स्पीड के कारण किसी भी वाहन की 100 किमी प्रतिघंटा या उससे अधिक गति खतरनाक मानी जाती है। इस स्पीड पर ब्रेकिंग डिस्टेंस कई गुना बढ़ जाती है और हल्की टक्कर भी घातक साबित हो सकती है। पैदल यात्री और दुपहिया सवार सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं। कानूनी कार्रवाई में आपराधिक मुकदमा दर्ज हो सकता है और लाइसेंस सस्पेंड होना संभव है। दुर्घटना की स्थिति में बीमा क्लेम पर भी असर पड़ सकता है। मामले भारतीय न्याय संहिता की धारा 281 (खतरनाक व लापरवाह ड्राइविंग) और धारा 125 के साथ मोटर वाहन अधिनियम की धारा 183 व 184 (स्पीड लिमिट उल्लंघन व डेंजरस ड्राइविंग) में दर्ज किए जाते हैं।
रात में खतरनाक बनती टॉप-10 सड़कें
कलेक्टर की अधिसूचना की अनदेखी कलेक्टर ने शहरी क्षेत्र में वाहनों की अधिकतम गति तय कर रखी है। इसके बावजूद वैशालीनगर रोड, माकड़वाली रोड, पंचशील, पुष्कर रोड, जयपुररोड, लोहागल, स्टेशन रोड सहित कई इलाकों में ओवरस्पीडिंग बढ़ रही है। एक वर्ष में 2088 चालान किए, जिनमें 55% कार व चार पहिया वाहनों के थे।


