मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 10 फरवरी 2025 को देवास में लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1553 करोड़ रुपए की राशि ट्रांसफर की। इस दौरान उन्होंने कहा- अभी बहनों को 1250 रुपए दे रहे हैं। बहनों, तुम चिंता मत करना। धीरे-धीरे कर यह राशि 3000 रुपए होने वाली है। हम आपके खाते में आगे चलकर 3000 रुपए डालेंगे। एमपी में ये योजना लॉन्च हुए दो साल हो चुके हैं, इस दौरान कई मौकों पर सरकार की तरफ से योजना की राशि बढ़ाने की बात हो चुकी है। विपक्ष भी सरकार को इसकी याद दिलाता रहता है। इसके बाद इसी तरह की योजना देश के 8 राज्य लागू कर चुके हैं। इनमें से 4 में बीजेपी की तो 4 राज्यों में कांग्रेस और गठबंधन की सरकारें हैं। एक महीने पहले हुए दिल्ली चुनाव में भी बीजेपी ने महिला सम्मान योजना लागू करने का ऐलान किया था। बीजेपी को इसका फायदा मिला। जिन राज्यों में योजना लागू है, उनमें से 5 राज्य एमपी से ज्यादा राशि महिलाओं के खाते में डाल रहे हैं। अब कहा जा रहा है कि मप्र सरकार भी राशि बढ़ा सकती है। ये कब और कितनी बढ़ेगी? सरकार किन संभावनाओं को टटोल रही है? सरकार पर राशि बढ़ाने का प्रेशर क्यों है? इसे लेकर भास्कर ने एक्सपर्ट से बात की…पढ़िए, मंडे स्टोरी 4 पॉइंट्स में जानिए, लाड़ली योजना बीजेपी के लिए क्यों अहम 1. एमपी की 49% महिला वोटर्स को मिल रहा फायदा
2024 में हुए लोकसभा चुनाव के मुताबिक मप्र में 5.39 करोड़ वोटर्स हैं। इनमें से 2.60 करोड़ महिलाएं हैं। बीजेपी ने 2023 के चुनाव में इन महिला वोटरों को अपने पाले में लाने के लिए योजना लॉन्च की थी। उस समय हितग्राहियों की संख्या 1.31 करोड़ थी। फिलहाल योजना का फायदा 1.27 करोड़ महिलाओं को मिल रहा है। ये आंकड़ा महिला वोटर्स का 49 फीसदी है। 2. एमपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने हारी बाजी जीती
विधानसभा चुनाव की वोटिंग तक महिलाओं के खाते में योजना की 6 किस्त पहुंच चुकी थीं इसलिए महिलाओं का बीजेपी पर भरोसा बढ़ा। चुनावी सर्वे कराने वाली पोलस्टार कंसल्टिंग फर्म के मुताबिक बीजेपी को विधानसभा चुनाव में महिलाओं के 50 फीसदी वोट मिले। वहीं, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष ने अपनी टीम के साथ एक रिपोर्ट तैयार की। जिसमें कहा गया कि एमपी में 10 हजार से कम मार्जिन वाली सीटों पर बीजेपी की जीत का चांस 28 फीसदी था, जो लाड़ली बहना के इफेक्ट से 100 फीसदी में बदल गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2029 के बाद सभी चुनावों में महिला वोटर निर्णायक होंगी। 3. लोकसभा चुनाव में भी रहा इफेक्ट
लाड़ली बहना योजना का इफेक्ट लोकसभा चुनाव में भी दिखाई दिया। बीजेपी ने इसी योजना के दम पर वो सीटें भी जीतीं, जहां कड़े मुकाबले की उम्मीद थी। राजगढ़ लोकसभा सीट पर कांग्रेस की ओर से पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने बीजेपी के रोडमल नागर को कड़ी टक्कर दी थी। नागर ने अपने पूरे प्रचार के दौरान राम मंदिर, लाड़ली बहना योजना का जिक्र किया। दिग्विजय की आखिरी चुनाव की भावनात्मक अपील काम नहीं आई। नागर ने दिग्विजय को 1 लाख से ज्यादा वोटों से हरा दिया। इसी तरह कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा में भी बीजेपी ने जीत का परचम लहराया। बीजेपी ने सभी 29 सीटें जीतकर क्लीन स्वीप किया। हालांकि, लोकसभा चुनाव में महिलाओं का वोटिंग पर्सेंट विधानसभा चुनाव के मुकाबले 12% कम रहा था। मगर, बीजेपी को ज्यादा वोट मिले। 4. बीजेपी को 4 और राज्यों में फायदा
महाराष्ट्र : एमपी के बाद बीजेपी ने महाराष्ट्र चुनाव से पहले माझी लाड़की बहिन योजना लागू की। 2.34 करोड़ महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपए खाते में डाले। इसके लिए 46 हजार करोड़ बजट रखा। चुनावी फायदा: महायुति गठबंधन ने विधानसभा चुनाव में राज्य की 288 में से 230 सीटें जीतीं। यानी महायुति का स्ट्राइक रेट 80% रहा। हरियाणा: भाजपा ने चुनाव से पहले महिलाओं को 2100 रुपए प्रतिमाह देने की गांरटी दी थी। 7 मार्च 2025 को योजना लॉन्च होने वाली है। योजना के लिए बजट में करीब 12 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया जा रहा है। ये कुल बजट का 1.2 प्रतिशत है। चुनावी फायदा: 41% महिलाओं ने भाजपा और 36% ने कांग्रेस का समर्थन किया। विधानसभा चुनाव में 90 में से 48 सीटें भाजपा जीती। छत्तीसगढ़ : 10 मार्च 2024 को पीएम नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना लॉन्च की। 70 लाख महिलाओं के खाते में प्रतिमाह 1000 रुपए सरकार ट्रांसफर कर रही है। योजना के लिए बजट में 3 हजार करोड़ का प्रावधान किया है। ये कुल बजट का 1.9% है। चुनावी फायदा: 2018 की तुलना में 2023 में 11 लाख से ज्यादा महिलाओं ने वोट किया। भाजपा ने विधानसभा की 90 में से 54 सीटें जीतीं। दिल्ली: चुनाव से पहले भाजपा ने महिलाओं और 60-70 साल के बुजुर्गों को हर महीने 2500 रुपए देने का ऐलान किया था। चुनावी फायदा: बीजेपी ने 26 साल बाद सरकार बनाई। कुल वोटर्स (72.37 लाख) में से 60.92% महिलाओं ने वोट किया। एमपी सरकार पर क्यों है योजना की राशि बढ़ाने का प्रेशर 1. दूसरे राज्यों में ज्यादा पैसा मिल रहा
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई इसकी दो वजह गिनाते हैं। पहली ये कि एमपी के बाद दूसरे राज्यों में भी इसी योजना के जरिए बीजेपी ने जीत हासिल की है। महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार महिलाओं को 1500 रुपए और हरियाणा की नायब सैनी सरकार 2100 रुपए दे रही है। मध्यप्रदेश में महिलाओं को 1250 रुपए ही मिल रहे हैं। जिस तरह से बाकी राज्यों के चुनाव में भी योजना ने बीजेपी को फायदा दिया है, उससे लगता है कि बीजेपी उन राज्यों में भी इसे आगे बढ़ाएगी, जहां आगामी दिनों में चुनाव होने वाले हैं। इसमें केरल और असम जैसे राज्य हैं। 2. सरकार वादे से मुकरना नहीं चाहती
किदवई कहते हैं कि एमपी सरकार राशि बढ़ाने के वादे से मुकरना नहीं चाहती। सरकार का एक साल पूरा होने पर खुद सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा था- जब से सरकार बनी थी, सब कह रहे थे ये योजना चल नहीं पाएगी। सरकार पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। हम ये बात जरूर मानते हैं कि इसका लोड पड़ रहा है, लेकिन सरकार अपने आय के साधन भी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। किदवई भी मानते हैं कि राज्यों के लिए ऐसी योजनाओं के लिए पैसा जुटाना बहुत बड़ी चुनौती है। सरकारें केंद्र से मिले फंड को इधर-उधर एडजस्ट कर योजना का फायदा दे रही हैं। मप्र में 2027 में निकाय चुनाव भी होने हैं, ऐसे में योजना जारी रखना बीजेपी के लिए जरूरी है। वहीं, सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग स्टडीज (सीएसडीएस)- लोकनीति के सह निदेशक प्रोफेसर संजय कुमार कहते हैं कि योजना कारगर है, ये चुनाव नतीजे साबित करते हैं। मगर, ऐसी योजनाएं सरकार की आर्थिक सेहत का प्रेशर बढ़ाने वाली होती है। राशि बढ़ाने को लेकर दो संभावनाओं पर हो रहा विचार ये खबर भी पढ़ीं… दो साल में साढ़े 3 लाख लाड़ली बहना कम हुईं विधानसभा चुनाव से पहले शिवराज सरकार द्वारा शुरू की गई लाड़ली बहना योजना को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार सवाल उठाता रहा है। इन आरोपों के बीच चौंकाने वाली जानकारी भी सामने आई है कि समग्र पोर्टल से लाड़ली बहनों के नाम डिलीट किए जा रहे हैं। साथ ही समग्र पोर्टल से आधार को डीलिंक किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों से लेकर ब्लॉक, स्थानीय निकाय और कलेक्टरों तक इसकी शिकायतें पहुंच रही हैं। पढ़ें पूरी खबर…


