रेगिस्तानी बाड़मेर में मार्च लगते ही गर्मी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। सोमवार को अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक और न्यूनतम 23.3 डिग्री दर्ज किया गया, जो सामान्य से ज्यादा है। दिन और रात दोनों समय पारा ऊंचा रहने से घरों में पंखे चलने लगे हैं। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि इस बार मार्च में भीषण गर्मी पड़ सकती है। फरवरी में ही बढ़ गया था तापमान इस वर्ष सर्दी का असर केवल जनवरी तक ही सीमित रहा। फरवरी में तापमान लगातार बढ़ता गया और महीने के अंतिम दिनों में पारा सामान्य से 3-4 डिग्री अधिक दर्ज किया गया। पहले जहां सुबह गुलाबी ठंड महसूस होती थी, अब वह लगभग गायब हो चुकी है। मार्च की शुरुआत के साथ ही सूरज की किरणें तेज और चुभने वाली हो गई हैं। धुलंडी के दिन भी सुबह से ही तेज धूप के कारण लोगों को गर्मी का एहसास होने लगा। सामान्य से ज्यादा दिन-रात का पारा मौसम विशेषज्ञों के अनुसार फरवरी के अंत और मार्च की शुरुआत में इस तरह का तापमान असामान्य श्रेणी में आता है। सामान्यतः मार्च में रात का तापमान 20 डिग्री और दिन का अधिकतम 35-36 डिग्री के आसपास रहना चाहिए, लेकिन इस बार फरवरी में ही यह स्तर पार हो गया। ग्लोबल वार्मिंग और हीट आइलैंड इफेक्ट का असर विशेषज्ञों का कहना है कि बाड़मेर जैसे रेगिस्तानी क्षेत्रों में हीट आइलैंड इफेक्ट और ग्लोबल वार्मिंग का असर जल्दी और अधिक तीव्रता से दिखाई देता है। यदि मार्च के पहले सप्ताह में ही यह स्थिति है, तो अप्रैल और मई में तापमान 48 से 50 डिग्री तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी जा रही है।


