भास्कर न्यूज | कोंडागांव बढ़ती अवैध कटाई, आगजनी और अतिक्रमण की घटनाओं के बीच अब जंगलों की सुरक्षा के लिए एक नई और अनूठी पहल शुरू की गई है। गांव के पारंपरिक मुखिया, मांझी, चालकी, पटेल, गायता, सिरहा और गुनिया अब सीधे तौर पर वन विभाग के साथ मिलकर जंगलों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। वन विभाग दक्षिण वन मंडल द्वारा कोंडागांव काष्ठागार परिसर में एक मेगा कैंप आयोजित किया गया। इस शिविर में जिले भर के गांवों से आए बैगा, सिरहा, गुनिया और अन्य पारंपरिक प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया। वन विभाग का मानना है कि यदि गांव की पारंपरिक नेतृत्व व्यवस्था साथ आएगी तो वनों की सुरक्षा को जमीनी मजबूती मिलेगी। लेकिन बस्तर क्षेत्र में नक्सल प्रभाव बढ़ने के बाद हथियार वापस ले लिए गए। अब अवैध लकड़ी तस्करी और सुरक्षा जोखिमों के चलते वन विभाग फिर से हथियारों की आवश्यकता महसूस कर रहा है। विभाग का तर्क है कि जब कर्मचारी अवैध कटाई रोकने पर विवाद और तनाव की स्थिति बन जाती है, ऐसे में आत्मरक्षा के लिए हथियार जरूरी हो जाते हैं। उपचार से संरक्षण तक बदली भूमिका: अब तक सिरहा, बैगा और गुनिया गांवों में पारंपरिक उपचार और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए जाने जाते थे। लेकिन अब वे पेड़ों की कटाई रोकने, जंगलों में आग लगने से बचाने और ग्रामीणों को जागरूक करने में भी भूमिका निभाएंगे। उनका कहना है कि जिस तेजी से पेड़ कट रहे है, उससे आने वाली पीढ़ियों की वनोपज और आर्थिक आय प्रभावित होगी।


