झुंझुनूं सब-रजिस्ट्रार कार्यालय बनेगा ‘मॉडल ऑफिस:अब बिचौलियों का खेल खत्म, सीधे जनता को मिलेगा सरकारी दरों का लाभ

झुंझुनूं शहर के सब-रजिस्ट्रार कार्यालय (पंजीयन कार्यालय) को ‘मॉडल ऑफिस’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इस पहल का सीधा मकसद रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और आम जनता को उन पेचीदगियों से निजात दिलाना है, जिनकी वजह से उन्हें अब तक दलालों या बिचौलियों के चक्कर काटने पड़ते थे। तकनीक से सुधरेगी व्यवस्था: क्या है ‘मॉडल ऑफिस’ का विजन मॉडल ऑफिस का अर्थ केवल रंग-रोगन या नया फर्नीचर नहीं है, बल्कि एक ऐसी कार्यप्रणाली विकसित करना है जहां तकनीक और पारदर्शिता का संगम हो। डीड (दस्तावेज) तैयार करने वालों को अब इस बात की स्पष्ट जानकारी होगी कि सरकार द्वारा निर्धारित दरें क्या हैं। डिजिटल इंटरफेस: कार्यालय को पूरी तरह से हाई-टेक बनाया जाएगा, जिससे फाइलों का ट्रैक रखना और अप्वाइंटमेंट लेना आसान होगा। ई-गवर्नेंस पर जोर: रजिस्ट्री की प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम कर इसे सॉफ्टवेयर आधारित बनाया जा रहा है। बिचौलियों की छुट्टी, जनता की बचत अक्सर देखा गया है कि रजिस्ट्री के काम में आम आदमी को स्टांप ड्यूटी, सर्विस चार्ज और अन्य शुल्कों की सही जानकारी नहीं होती। इसी का फायदा उठाकर बिचौलिए मोटी रकम वसूलते हैं। मुख्य बदलाव: मॉडल ऑफिस बनने के बाद, सभी सरकारी दरों का डिस्प्ले डिजिटल बोर्ड पर होगा और गणना की प्रक्रिया इतनी सरल होगी कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी ‘मदद’ के अपना काम करवा सकेगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि जनता की जेब पर पड़ने वाला अतिरिक्त भार भी कम होगा। मॉडल ऑफिस की प्रमुख विशेषताएं
सुगम रजिस्ट्री प्रक्रिया: दस्तावेजों की जांच और पंजीकरण के लिए सिंगल विंडो सिस्टम जैसी सुविधा। वेटिंग रूम और सुविधाएं: कार्यालय में आने वाले आम नागरिकों के लिए बैठने की उत्तम व्यवस्था और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं। हेल्पडेस्क की स्थापना: एक विशेष डेस्क जो लोगों को फॉर्म भरने और सरकारी नियमों को समझने में मदद करेगी। भ्रष्टाचार पर लगाम: सीसीटीवी निगरानी और सीधी जवाबदेही से कार्यप्रणाली में ईमानदारी आएगी। आमजन को कैसे होगा सीधा लाभ अब तक डीड तैयार करने वालों को कई बार काउंटर दर काउंटर भटकना पड़ता था। मॉडल ऑफिस की नई कार्यशैली में हर काम के लिए एक ‘सिटीजन चार्टर’ होगा, जिससे पता रहेगा कि रजिस्ट्री में कितना समय लगेगा। सीधी ई-पेमेंट: शुल्क का भुगतान सीधे सरकारी खातों में डिजिटल माध्यम से करने को बढ़ावा दिया जाएगा।
तकनीकी सहायता: आम जनता खुद भी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी डीड की स्थिति जांच सकेगी।

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