अजमेर शहर के हरिभाऊ उपाध्याय (HBU) मेन स्कीम इलाके में बांडी नदी के किनारे बनाए गए कचरा डिपो को लेकर विरोध सामने आया है। यहां बने प्लाटेंशन बेल्ट और पाथ-वे पर कचरा डालने से आस-पास के इलाकों में बदबू फैल रही है। मक्खियों और आवारा जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे निवासियों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इसे लेकर पर्यावरण प्रेमी ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB), नगर निगम अजमेर के आयुक्त और अजमेर विकास प्राधिकरण (ADA) को शिकायत भेजी है। साथ ही समस्या समाधान नहीं होने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की शरण लेने की चेतावनी दी है। अजमेर नगर निगम के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी रमेश चौधरी का कहना है कि मैंने अभी हाल में पदभार ग्रहण किया है। जानकारी लेकर उचित कार्रवाई करेंगे। शिकायतकर्ता द्रुपद मलिक ने शिकायत में बताया कि हरिभाऊ उपाध्याय मेन स्कीम के घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके, पार्कों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के करीब एक अवैध और अवैज्ञानिक डंप साइट बना दी गई है । यह डंप साइट बांडी नदी के ठीक बगल में स्थित है, जो फॉयसागर/वरुणसागर झील के ओवरफ्लो पानी को आनासागर झील तक ले जाने वाला मुख्य जल चैनल है । यहां नगर निगम और उसके ठेकेदारों की ओर से बिना किसी वैज्ञानिक सुरक्षा (जैसे अभेद्य लाइनिंग या लीचेट कलेक्शन सिस्टम) के मिश्रित कचरा खुले में फेंका जा रहा है। बारिश के दौरान इस कचरे का प्रदूषित पानी (लीचेट) और प्लास्टिक बांडी नदी के जरिए आनासागर झील में जा रहा है, जिससे झील और स्थानीय भूजल दोनों प्रदूषित हो रहे हैं । कचरे के कारण इलाके में बदबू फैल रही है, मक्खियों और आवारा जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे निवासियों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। हरिभाऊ उपाध्याय स्कीम के स्वीकृत लेआउट प्लान के अनुसार, यह जगह बांडी नदी के बफर के रूप में ‘प्लांटेशन बेल्ट’ या हरे-भरे क्षेत्र के लिए आरक्षित थी । आरक्षित ग्रीन बेल्ट में डंप यार्ड बनाना योजनाबद्ध विकास के खिलाफ है और यह कृत्य कई कानूनों का सीधा उल्लंघन है। नियमों का हवाला भी दिया सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016- बिना वैज्ञानिक तरीके के खुले में कचरा फेंकना और जल स्रोतों के पास डंपिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है । इसी प्रकार जल और वायु प्रदूषण अधिनियम- प्रदूषित पानी को नदी (बांडी नदी) में जाने देना जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 का उल्लंघन है, जबकि खुले डंपिंग से उठने वाली बदबू वायु अधिनियम, 1981 का उल्लंघन करती है । संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण नागरिकों का मौलिक अधिकार है। सात दिन का अल्टीमेटम शिकायतकर्ता ने रिहायशी इलाके और नदी के पास कचरा डालना तुरंत रोकने और साइट को आधिकारिक तौर पर बंद घोषित करने, पुराने कचरे (लिगेसी वेस्ट) को बायो-माइनिंग के जरिए हटाने व स्वीकृत नक्शे के अनुसार उस जगह पर फिर से मिट्टी डालकर प्लांटेशन बेल्ट विकसित करने व डंप यार्ड को बनाने की अनुमति देने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही यदि 7 दिनों के भीतर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे NGT अधिनियम 2010 के तहत राष्ट्रीय हरित अधिकरण में मामला दर्ज करने की चेतावनी दी है। ………….. पढें ये खबर भी… दैनिक भास्कर के सरपंच रेटिंग सर्वे को लेकर उत्साह:ग्रामीण एक दूसरे को दिखा रहे डेटा, कहा-पहली बार ऐसा मौका मिला दैनिक भास्कर एप पर शुरू किए गए सरपंच रेटिंग सर्वे को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह है। गांव के लोग इस सर्वे में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। ग्रामीण चौपालों पर सर्वे को लेकर चर्चा कर रहे हैं और मोबाइल पर एक-दूसरे को सर्वे के आंकड़े बता रहे हैं। पूरी खबर पढें


