जवाहर कला केन्द्र के साउथ विंग में इन दिनों सहारा आर्ट एंड क्राफ्ट फेयर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस मेले में देशभर के पारंपरिक क्राफ्ट और सिल्क उत्पादों की भव्य प्रदर्शनी लगाई गई है। खास बात यह है कि इसमें नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित आर्टिजन भी हिस्सा ले रहे हैं, जो अपने हाथों से तैयार किए गए उत्कृष्ट उत्पादों को प्रदर्शित कर रहे हैं। आयोजक धर्म सिंह ने बताया कि इस फेयर में भारत के अलग-अलग राज्यों की कला और संस्कृति की झलक एक ही छत के नीचे देखने को मिल रही है। यहां लोग न केवल खरीदारी कर रहे हैं, बल्कि विभिन्न हस्तशिल्प और सिल्क उत्पादों की बारीकियों के बारे में जानकारी भी प्राप्त कर रहे हैं। बनारस से भागलपुर तक साड़ियों की शान मेले में बनारस की प्रसिद्ध बनारसी साड़ियां अपनी पारंपरिक जरी और ब्रोकेड कारीगरी के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। भागलपुर सिल्क साड़ियां अपनी प्राकृतिक चमक और हल्केपन के लिए पसंद की जा रही हैं। कोटा डोरिया की साड़ियां और सूट अपनी महीन बुनावट और हल्के कपड़े के कारण गर्मियों के लिए खास माने जाते हैं। लखनऊ की चिकनकारी साड़ियां और कुर्तियां अपनी नाजुक हाथ की कढ़ाई से महिलाओं को लुभा रही हैं, वहीं बगरू प्रिंट और हैंड प्रिंट साड़ियां प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटिंग के कारण विशेष आकर्षण बटोर रही हैं। बांधनी और बंधेज की रंग-बिरंगी साड़ियां और दुपट्टे होली के मौके पर खासे पसंद किए जा रहे हैं।
ड्रेस मैट्रियल और परिधानों की विविधता भारतपुर के ड्रेस मैट्रियल, जयपुर की स्टाइलिश कुर्तियां, पंजाबी सूट, वेस्ट बंगाल की साड़ियां और सूट हर आयु वर्ग की महिलाओं को आकर्षित कर रहे हैं। कश्मीरी पश्मीना शॉल और कश्मीरी शॉल अपनी गर्माहट और महीन ऊन की गुणवत्ता के कारण खास पहचान रखते हैं। जयपुर की स्टोन ज्वैलरी, इमिटेशन ज्वैलरी और वन ग्राम गोल्ड ज्वैलरी महिलाओं के बीच खासा आकर्षण का केंद्र हैं। पारंपरिक और आधुनिक डिजाइनों का सुंदर मेल यहां देखने को मिल रहा है। जयपुर और पंजाबी जूतियां रंग-बिरंगे धागों और कढ़ाई से सजी हुई हैं, जो पारंपरिक परिधानों के साथ खूब जंचती हैं।
हस्तशिल्प और सजावटी उत्पाद मुरादाबाद के ब्रास आर्टिकल अपनी बारीक नक्काशी और धातु कला के लिए प्रसिद्ध हैं। खुर्जा की क्रॉकरी आइटम्स आकर्षक डिजाइन और चमकदार फिनिश के साथ घर की सजावट को नया रूप देती हैं। मिर्जापुरी दरियां और कारपेट मजबूत बुनावट और पारंपरिक डिजाइनों के कारण पसंद किए जा रहे हैं। उड़ीसा की पेंटिंग्स और बिहार की मधुबनी पेंटिंग्स भारतीय लोक कला की समृद्ध परंपरा को दर्शाती हैं। इन पेंटिंग्स में प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक प्रतीकों का सुंदर समावेश देखने को मिलता है। इसके अलावा गुजराती बैग, कट वर्क डिजाइन, मैसूर की अगरबत्ती की सुगंध, कश्मीर के ड्राय फ्रूट्स और कानपुर के बैग व लैदर बेल्ट भी मेले में उपलब्ध हैं। फेयर में युवाओं से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक का उत्साह देखने को मिल रहा है। होली के मद्देनजर रंग-बिरंगे परिधान और पारंपरिक उत्पादों की खरीदारी में विशेष रुचि नजर आ रही है।


