बांसवाड़ा में होलिका की परिक्रमा बच्चों ने की:फाग गीतों की धुन गूंजने लगी, कल मनाई जाएगी धुलंडी

वागड़ की धरा पर लोक संस्कृति और आस्था का संगम देखने को मिल रहा है। बांसवाड़ा में होली का त्योहार पूरी धूमधाम से मनाया जा रहा है। शाम को शुभ मुहूर्त में शहर व गांव के चौराहों और निर्धारित स्थानों पर होलिका दहन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर पूजन किया। ​परंपरा: बच्चों की सुख-समृद्धि के लिए करवाई परिक्रमा ​ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पुरानी परंपराओं का निर्वहन किया जा रहा है। होलिका दहन के समय बड़ी संख्या में महिलाएं अपने बच्चों को लेकर पहुंचीं। यहां बच्चों को होलिका की परिक्रमा करवाई गई। मान्यता है कि होलिका की आंच और परिक्रमा से बच्चे मौसमी बीमारियों और बुरी नजर से सुरक्षित रहते हैं। बुजुर्गों ने बताया कि पीढ़ी दर पीढ़ी यह परंपरा चली आ रही है। आस्था: धधकते अंगारों पर नंगे पैर चले जिले के भचड़िया गांव में इस वर्ष भी होली का पर्व अपनी प्राचीन और हैरतअंगेज परंपराओं के साथ मनाया गया। यहां होलिका दहन के बाद दहकते हुए अंगारों पर नंगे पैर चलने की रस्म निभाई गई। आस्था का आलम यह था कि युवाओं ने बिना किसी डर के धधकते हुए अंगारों के बीच से रास्ता पार किया। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज की युवा पीढ़ी भी इसे पूरी श्रद्धा के साथ निभा रही है। ​कठिन नियम: सूर्योदय से अन्न-जल का त्याग ​गांव के डूंगर सिंह ने बताया कि अंगारों पर चलने की यह प्रक्रिया जितनी सरल दिखती है, इसके नियम उतने ही कठिन हैं। जो युवा अंगारों पर चलने का संकल्प लेते हैं, वे सुबह सूर्योदय के बाद से ही अन्न और जल का पूरी तरह त्याग कर देते हैं। दिनभर निर्जला उपवास रखने के बाद शाम को पूर्ण शुद्धता और अपनी मनोकामना पूर्ति की इच्छा के साथ वे इन अंगारों के बीच से गुजरते हैं। ​कल मचेगा धुलंडी का हुड़दंग ​गांवों में आज से ही फाग गीतों की गूंज सुनाई देने लगी है। लोग एक दूसरे को होली की बधाई देते नजर आए। होलिका दहन के बाद अब कल धुलंडी का पर्व मनाया जाएगा। लोग एक-दूसरे पर रंग-गुलाल डालकर खुशियां साझा करेंगे। पुलिस और प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि शांतिपूर्वक त्योहार मनाया जा सके।

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