स्कूलों में मध्याह्न भोजन बनाने वाले रसोइयों का आंदोलन फिलहाल होली तक स्थगित कर दिया गया है। प्रदेश रसोईया विकास महासंघ अंबिकापुर इकाई 22 फरवरी से वेतन वृद्धि, नियमितीकरण, सेवा मुक्ति से पहले कलेक्टर की सहमति और निष्कासन पर रोक जैसी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल कर रही थी। अब संघ ने त्योहार को देखते हुए आंदोलन अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में उन्हें मात्र 2 हजार रुपए मासिक मानदेय दिया जा रहा है, जो प्रतिदिन लगभग 66 रुपए के बराबर है। इतनी कम राशि में परिवार का भरण-पोषण संभव नहीं है। रसोइयों ने मानदेय में पर्याप्त वृद्धि और नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग दोहराई है। संघ के संरक्षक मुकेश गोस्वामी ने कहा कि यह लड़ाई रसोइयों के सम्मान और अधिकारों की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि होली के बाद पुनः अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा। सोमवार को रसोइया संघ ने शहर में रैली निकालकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। संघ के अध्यक्ष चिंतामणि दास ने कहा कि उनकी प्रमुख मांग मासिक मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि है। इसके साथ ही नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी की जा रही है। प्रदर्शन में अधिवक्ता संजय अम्बस्ट भी शामिल हुए और रसोइयों को कानूनी सहयोग देने की बात कही। रसोइयों का कहना है कि उनके श्रम के अनुरूप पारिश्रमिक नहीं मिल रहा।


