डीडवाना की डोलची गेर राजस्थान की प्रमुख होलियों में से एक है। यह अनूठी परंपरा जिले सहित पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान रखती है। डोलची एक विशेष प्रकार का बर्तन होता है, जिसमें पानी भरकर पीछे से पीठ पर मारा जाता है। यह वर्षों पुरानी परंपरा विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जो होली के अवसर पर आकर्षण का केंद्र बनती है। परंपरा के अनुसार, सबसे पहली डोलची ‘हाकम’ को मारकर डोलची गेर की विधिवत शुरुआत की गई। इसके बाद गेर आनंद भवन, चारभुजा मंदिर, झालरिया मठ, बांगड़ चौक, मूंदड़ो की गली, कोट मोहल्ला, श्यामजी का चौक और गगड़ो का चौक से होते हुए नृसिंह चौक पर समाप्त हुई। पूरे मार्ग में उत्साह और पारंपरिक रंग देखने को मिले।
डोलची गेर की खास बात यह है कि इसमें वर्षों से केवल पानी का ही उपयोग किया जाता है। यह सामान्य होली में रासायनिक रंगों के दुष्प्रभावों की चिंता से मुक्त एक सुरक्षित और प्राकृतिक तरीका है। रंग-बिरंगी गुलाल और पानी की बौछारों के बीच डोलची गेर ने एक बार फिर डीडवाना की होली को खास बना दिया।


