जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में रविवार को एक 23 साल की युवती के लंग्स और हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया था। युवती की बुधवार को मौत हो गई। वह तीन दिनों से वेंटिलेटर सपोर्ट पर थी। डॉक्टर्स ने बताया- ट्रांसप्लांट के बाद हार्ट और लंग्स प्रॉपर काम कर रहे थे। मंगलवार तक हालत स्थिर थी। बुधवार को अचानक शरीर में ब्लड संबंधी कॉम्प्लिकेशन होने लगे। इसे मेडिकल भाषा में (डीआईएस – डिसेमिनेटेड इंट्रावैस्कुलर कोएगुलेशन) कहते हैं। इस कॉम्प्लिकेशन में मरीज के शरीर में खून न तो जमता है और न रुकता है। इसमें ब्लिडिंग ज्यादा होती है। इस कारण मरीज के शरीर के सभी टिश्यू में खून के थक्के बन गए और उसकी मौत हो गई। तीन दिन से वेंटिलेटर सपोर्ट पर थी मरीज
जानकारी के अनुसार रविवार को एसएमएस हॉस्पिटल में पहली बार फेफड़ों का ट्रांसप्लांट कर इतिहास रचा गया था। 23 वर्षीय युवती का लंग्स के साथ हार्ट ट्रांसप्लांट भी किया गया था। एक ही मरीज के लंग्स और हार्ट (कॉम्बो ट्रांसप्लांट) एक साथ ट्रांसप्लांट होने का ये पहला केस था। ऑपरेशन के बाद मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर थी। झालावाड़ में ब्रेन डेड मरीज के ऑगर्न (लंग्स, किडनियां, लीवर, हार्ट) को ट्रांसप्लांट करने के लिए सरकार ने हेलिकॉप्टर भेजा था। इनमें से लंग्स, हार्ट और एक किडनी का जयपुर में ट्रांसप्लांट किया गया, जबकि एक किडनी और लीवर को ट्रांसप्लांट के लिए जोधपुर भेजा गया। जयपुर में इस ऑपरेशन में काम आना वाला एक सॉल्यूशन (परसोडेक्स) भी रातों-रात तमिलनाडु से फ्लाइट के जरिए मंगवाया था। डॉक्टर्स का दावा था- हार्ट और लंग्स काम कर रहे
ऑपरेशन करने वाली टीम के हेड डॉक्टर राजकुमार यादव ने बताया था- ये उत्तर भारत में इतिहास है। शायद ही उत्तर भारत में कहीं लंग्स ट्रांसप्लांट किया गया हो। सर्जरी काफी जटिल थी, लेकिन कामयाब रही। हमने और हमारी टीम ने पूरी मेहनत के साथ काम को पूरा किया। उन्होंने बताया था- मरीज के जो हार्ट और लंग्स लगाए गए हैं, वह वर्क कर रहे हैं, लेकिन फिर भी हमने अभी पूरी बॉडी को पंप पर रख रखा है और दो-तीन दिन ऐसी ही स्थिति में रखा जाएगा। मरीज के हर पैरामीटर और उस ऑर्गन के फंक्शन का मिनट-टू-मिनट एग्जामिन कर रहे हैं, ताकि ये देखा जा सके कि हर फंक्शन का रिस्पॉन्स तो ठीक आ रहा है न। यूरिन आउटपुट, ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन लेवल आदि पर नजर बना रखी है। डॉक्टर ने बताया- मरीज के सभी अंग अभी वर्क तो कर रहे हैं, लेकिन फिर भी उसे वेंटिलेटर सपोर्ट (पम्प सपोर्ट) पर रखा है। जब तक आश्वस्त नहीं हो जाते कि सभी अंग अच्छे से वर्क कर रहे हैं और उनके सपोर्ट पर मरीज ठीक रहेगा, तब तक वेंटिलेटर सपोर्ट जारी रहेगा। पहली बार एयरलिफ्ट कर लाए गए थे ऑर्गन
दरअसल, 10 दिसंबर को झालावाड़ के एक युवक विष्णु (33) को एसआरजी हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था। विष्णु का झगड़ा हुआ था और उसे सिर में चोट लगी थी। सिर के ऑपरेशन के बाद भी 13 दिसंबर को वह ब्रेनडेड हो गया था। इसके बाद परिजनों ने ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए परमिशन दी थी। विष्णु के हार्ट, किडनी, लिवर, फेफड़े और कॉर्निया डोनेट किए गए थे। 15 दिसंबर को ये ऑर्गन हेलिकॉप्टर से लाए गए थे। जयपुर में हार्ट, लंग्स और एक किडनी उतारे गए थे, जबकि जोधपुर एम्स में एक किडनी और लिवर भेजा गया था। ————- ये खबर भी पढ़ें… हेलिकॉप्टर से ऑर्गन लाने के बाद युवती के हार्ट-फेफड़े बदले:दो दिन वेंटिलेटर पर रहेगी; जोधपुर एम्स में रात 2 बजे किडनी-लिवर मरीज को लगाए प्रदेश में रविवार को पहली बार ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया था। तीन घंटे में डोनर विष्णु के ऑर्गन हार्ट और लंग्स जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल, किडनी और लिवर को जोधपुर के एम्स पहुंचाया गया था। (यहां पढ़ें पूरी खबर) हेलिकॉप्टर से जयपुर-जोधपुर पहुंचाए हार्ट, किडनी और फेफड़े:ब्रेनडेड युवक के आठ अंग डोनेट किए, बचाई 3 जिंदगी; झगड़े में लगी थी चोट राजस्थान में पहली बार ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया। तीन घंटे के अंदर हेलिकॉप्टर ने झालावाड़ से जयपुर और जोधपुर में हार्ट-किडनी-लिवर पहुंचाए। अंग सुरक्षित रहें, इसलिए जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल और जोधपुर एम्स के एक किलोमीटर के दायरे में ही हेलिकॉप्टर की लैंडिंग कराई गई। (यहां पढ़ें पूरी खबर)


