चंद्रग्रहण के चलते उदयपुर के मंदिरो में नहीं खेली होली:शाम 7 बजे शुद्विकरण और पूजा के बाद दर्शन शुरू हुए, प्रभु को कल लगेगी अबीर-गुलाल

इस साल का पहला चंद्रग्रहण आज दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहा। ग्रहण 4 घंटे 26 मिनट तक चला। श्री सत्यनारायण पूर्णिमा के दिन ग्रहण के कारण सुबह से ही धार्मिक गतिविधियों में बदलाव देखने को मिला। ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले सुबह 6 बजकर 55 मिनट पर सूतककाल शुरू हो गया था। शाम 7 बजे बाद सभी मंदिरों में पूजा हुई और फिर से दर्शन हुए। उदयपुर भी इस कारण मंदिरो में होली नहीं खेली गई। सुबह से मंदिरो में सेवा-पूजा भी नहीं की गई। शाम को ग्रहण होने के बाद पवित्र स्नान के बाद भगवान की पूजा हुई। ग्रहण के दौरान सभी मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। जगदीश मंदिर और बोहरा गणेश मंदिर में भगवान को आज होली नहीं खेली गई। हालांकि श्रीनाथ जी मंदिर हवेली में पूर्व की निर्धारित व्यवस्था के अनुसार दर्शन होते रहे। वहां ग्रहण के चलते कोई बदलाव नहीं किया गया है। बोहरा गणेश मंदिर के पुजारी लोकेश जोशी ने बताया कि सूतक के दौरान दिनभर में होली नहीं खेलाई गई। सेवा- पूजा भी नहीं हो पाई। भगवान बोहर गणेश को बुधवार को अबीर से होली खेलाई जाएगी। चंद्रोदय शाम 6 बजकर 22 मिनट पर हुआ, जबकि ग्रहण की समाप्ति 6 बजकर 47 मिनट पर हुई। अब जानते हैं चंद्रग्रहण क्या है? गुरुत्वाकर्षण बल यानी ग्रेविटेशनल फोर्स की वजह से पृथ्वी और सभी दूसरे ग्रह सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। पृथ्वी 365 दिनों में सूर्य का एक चक्कर लगाती है। जबकि चंद्रमा एक प्राकृतिक उपग्रह है, जो पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है। उसे पृथ्वी के एक चक्कर लगाने में 27 दिन लगते हैं। सूर्य के चक्कर लगाने के दौरान कई बार ऐसी स्थिति बनती है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है। इस दौरान सूर्य का प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ने से चंद्र ग्रहण होता है। चंद्रग्रहण की घटना तभी होती है जब सूर्य, पृथ्‍वी और चंद्रमा एक सीध में हो, खगोलीय विज्ञान के अनुसार ये केवल पूर्णिमा के दिन ही संभव होता है। इसी वजह से ज्यादातर चंद्रग्रहण केवल पूर्णिमा के दिन होते हैं। सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद सूतक लगते ही उदयपुर के मंदिरों में नियमित पूजा-पाठ रोक दिया गया था। परंपरा के अनुसार सूतक और ग्रहणकाल में पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और खाना-पीना वर्जित माना जाता है। इसी वजह से मंदिरों में सुबह की नियमित झांकियों और दर्शनों के बाद कपाट बंद कर दिए गए। सूतक सुबह 6 बजकर 55 मिनट से शुरू होकर शाम तक चला। ग्रहण समाप्त होने के बाद शाम को शुद्धिकरण और स्नान करवाया गया। देवालयो और मंदिरो में 4 मार्च को भी रंगों की होली यानी धुलंडी मनाई जाएगी

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