यूआईटी घोटाला:अब जमीन अफसरों को नाप रही, 6 दिन में दूसरे पूर्व सचिव निलंबित, 4 अफसर और होंगे

नगर विकास प्रन्यास (यूआईटी) में हुए भ्रष्टाचार को लेकर अफसरों पर गाज गिरना जारी है। अब एक और पूर्व सचिव राजेश जोशी को निलंबित किया गया है। अब तक तीन अफसर निलंबित किए जा चुके हैं। भास्कर के पास मौजूद तथ्यों के हिसाब से अभी 4 अफसर-कर्मचारियों पर ऐसी ही कार्रवाई होना बाकी है। पूर्व सचिव नितेंद्र पाल सिंह को 6 दिन पहले 26 फरवरी को निलंबित किया गया था। हालांकि, उनके निलंबन आदेश 28 फरवरी को रिटायरमेंट के दिन सामने आए थे। उनसे पहले तत्कालीन उप नगर नियोजक को निलंबित किया गया था। इन दोनों को नियमों के विरुद्ध आवंटन और लीज डीड जारी करने के 9 मामलों में 530 करोड़ के राजस्व की चपत लगाने के आरोप में निलंबित किया गया था, जबकि जोशी पर पद का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से पट्टे जारी करने के मामले में कार्रवाई हुई है। हालांकि, वे 530 करोड़ के घपला मामले में भी आरोपी हैं। कार्मिक विभाग के शासन उपसचिव महेश कुमार मीणा ने सोमवार को निलंबन आदेश जारी किए। जोशी अभी नाथद्वारा मंदिर मंडल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। निलंबन काल के दौरान उनका मुख्यालय कार्मिक विभाग के जयपुर स्थित शासन सचिवालय में रहेगा। बता दें कि यूआईटी अब यूडीए (उदयपुर विकास प्राधिकरण) में प्रमोट हो चुका है। भास्कर के पास मौजूद तथ्यों के अनुसार यूआईटी के इन चार अधिकारी व कर्मचारियों को इस फर्जीवाड़े में शामिल माना है। विधि शाखा ने इनकी कुंडली तैयार कर राज्य सरकार को भेज दी है। उनकी जांच जारी है। इसके बाद उनके निलंबन की कार्रवाई होगी। मुकदमे भी दर्ज हो सकते हैं। जोशी ने कोर्ट स्टे और तबादला होने के बाद भी दिए पट्टे सदन में विधायक बोले- कार्रवाई का भरोसा दिया था, दो माह बाद भी नहीं हुई निगम के 272 प्लॉटों के घोटाले पर भी ध्यान दीजिए, 10 आरोपी पकड़े, लेकिन इनमें अफसर एक भी नहीं शहर विधायक ताराचंद जैन ने सोमवार को विधानसभा में नगर निगम के 272 भूखंडों के घोटाले का मुद्दा फिर से उठाया। कहा कि प्रदेश की पिछली कांग्रेस सरकार में यह घोटाला हुआ। उन्होंने मुद्दा उठाया तो निगम ने करोड़ों की कीमत के 49 प्लॉट अधिकार में लिए। एसओजी ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन अभी तक एक भी अधिकारी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। विधायक जैन ने कहा कि सरकार ने दिसंबर-2024 तक जांच कर अधिकारियों पर कार्रवाई करना बताया था। इसे भी दो महीने गुजर गए। शहर विधायक ने आयड़ पुलिस चौकी, किशनपोल पुलिस चौकी और झामरकोटड़ा पुलिस चौकी को थानों में क्रमोन्नत करने की भी मांग की। मुखर्जी चौक में फिर से स्थायी पुलिस चौकी की जरूरत बताई। कहा कि 15 वर्ष पहले मुखर्जी चौक में पुलिस चौकी थी, जिसे कांग्रेस राज में हटा दिया गया। यहां महिलाओं का गुजरना मुश्किल होता है। कोर्ट के साथ जेल भी बलीचा में शिफ्ट कराने की मांग : विधायक ने कहा कि उदियापोल बस स्टैंड के पास सेंट्रल जेल है, जो करीब 50 बीघा जमीन पर फैली है। यह जमीन बहुमूल्य है। पहले जेल को देबारी शिफ्ट करने का प्रयास हुआ था, लेकिन फाइल दबी रह गई। बलीचा हाईवे पर कोर्ट के लिए जमीन आवंटित है। वहां काफी जमीन पड़ी है, सेंट्रल जेल को भी यहीं शिफ्ट किया जा सकता है। जेल और कोर्ट के आमने-सामने होने से बंदियों को पेशी पर लाने- जाने में भी सुविधा होगी।

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