सवाई माधोपुर में रणथंभौर के जंगल से सटे प्रसिद्ध त्रिनेत्र गणेश मंदिर के श्रद्धालुओं का सोमवार को बाघ ने रास्ता रोक लिया। इस दौरान टाइगर ने पैदल परिक्रमा करने वाले यात्रियों का रास्ता करीब 1 घंटे तक रोके रखा। जिससे श्रद्धालुओं की भीड़ जमा हो गई। दरअसल, सोमवार को फाल्गुन महीने की चतुर्थी पर त्रिनेत्र गणेश के भक्त पैदल परिक्रमा करते हुए जोगी महल गेट पर पहुंचे। इस दौरान सुबह 7 बजे यहां श्रद्धालुओं का सामना टाइगर से हो गया। परिक्रमा मार्ग पर बाघ को देखकर श्रद्धालुओं की सांसें अटक गई। श्रद्धालुओं ने इसकी सूचना वन विभाग के कर्मचारियों को दी। करीब 1 घंटे तक बना रहा टाइगर का मूवमेंट
सूचना मिलने के बाद वनकर्मी मौके पर पहुंचे। इस दौरान यहां जोगी महल गेट के आसपास टाइगर का मूवमेंट करीब 1 घंटे तक बना रहा। जिसके चलते एक से डेढ़ घंटे तक परिक्रमा मार्ग पर परिक्रमा बंद रही। इस दौरान वन विभाग के कर्मचारियों की ओर से बाघ की मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग की। इसी के साथ ही एहतियात के तौर पर परिक्रमा मार्ग को बंद रखा गया। करीब एक घंटे बाद जब बाघ ने जंगल की ओर रुख किया तो यहां फिर से परिक्रमा मार्ग पर परिक्रमा शुरू हो सकी और वन विभाग व श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बाघ कौनसा था। इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है फिलहाल बाघ का मूवमेंट जंगल में ही बना हुआ है। हालांकि संभावना जताई जा रही है कि यह बाघिन ऐरोहेड का शावक था। 20 फरवरी को भी बंद कर दिया था मंदिर
इससे पहले 20 फरवरी को भी त्रिनेत्र गणेश मंदिर को वन विभाग ने श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया था।
उस दौरान बाघिन टी-84 एरोहेड और उसके 2 शावकों ने मंदिर मार्ग पर स्थित हनुमान मंदिर के पास सांभर का शिकार किया था। बाघ परिवार शिकार स्थल के आसपास मौजूद था। ऐसे में एहतियात के तौर पर वन विभाग ने गणेश मार्ग को पूरी तरह से बंद कर दिया था। रणथंभौर फोर्ट जाने वाले पर्यटकों और त्रिनेत्र गणेश मंदिर के श्रद्धालुओं को गणेश धाम गेट पर ही रोका गया था। पढ़ें पूरी खबर… दरअसल बाघिन एरोहेड और उसके शावकों का रणथंभौर फोर्ट में अक्सर मूवमेंट बना रहता है। इससे पहले भी करीब चार-पांच बार बाघिन और उसके शावक इस क्षेत्र में पहुंच चुके हैं। जूनियर मछली के नाम से फेमस है बाघिन एरोहेड
बाघिन एरोहेड, बाघिन कृष्णा (टी-19) के दूसरे प्रसव की संतान है, जिसकी नानी मछली (टी-16) थी, जो रणथंभौर की मां के नाम से प्रसिद्ध थी। बाघिन एरोहेड मछली के वंश से है, इसलिए इसे जूनियर मछली भी कहा जाता है। एरोहेड के पहले लिटर (ब्यात) के 3 शावक जन्म के कुछ दिन बाद ही वन विभाग की नजरों से गायब हो गए थे। दूसरे लिटर में बाघिन ने 2 शावकों को जन्म दिया, जिन्हें टी-124 (रिद्धि) और टी-125 (सिद्धि) के नाम से जाना जाता है। तीसरी बार के शावक भी कुछ दिन बाद लापता हो गए थे, जबकि चौथी बार के तीनों शावक बाघिन एरोहेड के साथ ही हैं। रणथंभौर में फिलहाल 81 बाघ-बाघिन और शावक
रणथंभौर में 1 अक्टूबर से टूरिस्ट सीजन शुरू हुआ है। रणथंभौर टाइगर रिजर्व में कुल 10 जोन हैं। इनमें 2 पारियों में टाइगर सफारी होती है। सुबह की पारी में सफारी सुबह 6 से 9 बजे तक होती है। शाम की शिफ्ट में सफारी दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक होती है। रणथंभौर नेशनल पार्क 1700 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यहां 77 बाघ, बाघिन और शावक हैं। एक बाघ को लगभग 35 किलोमीटर टेरेटरी की आवश्यकता होती है। ऐसे में यहां 50 बाघ रह सकते हैं। यानी रणथंभौर में 31 बाघ-बाघिन क्षमता से अधिक हैं। 600 करोड़ का टूरिज्म
रणथंभौर टाइगर रिजर्व देश के सबसे लोकप्रिय टाइगर रिजर्व में से एक है, जो न केवल टाइगर बल्कि अन्य वन्यजीवों के लिए भी महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। साल 2024 में यहां से लगभग 600 करोड़ रुपए का राजस्व होने की उम्मीद है। राजस्थान में 140 से ज्यादा टाइगर
राजस्थान में वर्तमान में टाइगर की संख्या 140 से ज्यादा है। देशभर में इनकी संख्या करीब 3200 है। राजस्थान की कहानी इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि 1970-72 तक राज्य के लगभग 17 जिलों में टाइगर की मौजूदगी थी। यह मौजूदगी घटकर 2005 में केवल सवाई माधोपुर (रणथंभौर) तक सीमित रह गई। 2010 के बाद शुरू किए गए प्रयासों से अब राजस्थान के 6 जिलों- सवाई माधोपुर, अलवर, करौली, कोटा, बूंदी और उदयपुर में टाइगर मौजूद हैं। इन सभी टाइगर का पैतृक घर रणथंभौर ही है। देशभर में लगभग 53 टाइगर पार्क हैं। यह खबर भी पढ़े…
रणथंभौर से 10 दिन में दूसरी बार आई अच्छी खबर:बाघिन टी-122 ने 4 शावकों को दिया जन्म; टाइगर रिजर्व में अब 81 बाघ-बाघिन सवाई माधोपुर के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़ गया है। यहां बाघिन टी-122 ने 4 शावकों को जन्म दिया है। 10 दिन में दूसरी बार रणथंभौर से खुशखबरी आई है। इससे पहले 12 फरवरी को बाघिन RBT-103 दो शावकों के साथ कैमरा ट्रैप में कैद हुई थी। अब रणथंभौर में बाघों की संख्या बढ़कर 81 हो गई है। फिलहाल रणथंभौर में 24 बाघ, 25 बाघिन और 32 शावक हैं। (पढ़ें पूरी खबर)


