एक बार फिर उठी बाखासर सूखा बंदरगाह बनाने की मांग:विधानसभा में बोले-नहरी पानी से जोड़ा जाए, बन सकता है व्यापारिक हब

बाड़मेर जिले के चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल ने विधानसभा में मुंद्रा से बाखासर रण का समुद्री नहर का विस्तार करके बंदरगाह स्थापित करने का मुद्दा उठाया। चौहटन विधायक ने कहा कि गुजरात राज्य के मुंद्रा में निजी कम्पनी का बंदरगाह स्थापित है। वहां से कृत्रिम नहर बाड़मेर के बाखासर तक लाई जा सकती है। इस सम्बन्ध में निजी कंपनी की ओर से पूर्व में करवाए गए सर्वे के मुताबिक करीब 150 किलोमीटर लंबी नहर बनाने की आवश्यकता रहेगी। दरअसल, विधायक आदूराम मेघवाल सोमवार को राजस्थान विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन संबंधी नियम 295 के तहत विशेष उल्लेख प्रस्ताव पर बोलते हुए बंदरगाह बनाने की मांग सदन के समक्ष रखी। विधायक मेघवाल ने कहा कि बाड़मेर जिले के चौहटन विधानसभा क्षेत्र में स्थित बाखासर का रण का समुद्र स्तर अन्य जगहों के समान है। इस रण कच्छ को इंग्लिश चैनल की तरह जोड़ा जाए तो यहां बंदरगाह के रूप में विकसित करने की प्रबल सम्भावनाएं है। बाखासर रण भारतमाला परियोजना से उतर और दक्षिण भारत से जुड़ा हुआ बाड़मेर जिले के बाखासर तक यदि समुद्र के पानी को नहर के जरिए जोड़ा जाए तो बंदरगाह विकसित किया जाता है। यह स्थान पश्चिमी भारत का प्रमुख व्यापारिक केंद्र बन सकता है। बाखासर क्षेत्र सड़क मार्ग से भारतमाला परियोजना से उतर भारत व दक्षिण भारत के अन्य राज्यों से सुगम राष्ट्रीय उच्च मार्ग से जुड़ा हुआ है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां समुद्री बंदरगाह जैसी है। इससे देश-विदेश से आयात-निर्यात संसाधनों को समुद्री जहाजों से लाया जा सकेगा। यहां के आसपास की सारी जमीन क्षारीय, बंजर व अनुपयोगी है। गुजरात में निजी कंपनी का पोर्ट चौहटन विधायक ने कहा कि गुजरात राज्य के मुंद्रा में निजी कम्पनी का बंदरगाह स्थापित है। वहां से कृत्रिम नहर बाड़मेर के बाखासर तक लाई जा सकती है। इस सम्बन्ध में निजी कंपनी की ओर से पूर्व में करवाए गए सर्वे के मुताबिक करीब 150 किलोमीटर लंबी नहर बनाने की आवश्यकता रहेगी। 2015 में तत्कालीन सांसद सूखा बंदरगाह बनाने की मांग संसद में उठाई थी इसके साथ विधायक मेघवाल ने जिक्र किया कि इस सम्बन्ध में वर्ष 2015 में भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन स्थानीय सांसद की ओर से भी सूखा बंदरगाह बनाए जाने का मामला संसद में उठाया गया। इस प्रस्ताव को पूर्व में सैद्धांतिक मंजूरी दी थी किंतु उक्त प्रस्ताव पर अभी तक कोई कार्यवाही अथवा परियोजना नहीं बनाई गई।

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