दूसरे राज्यों से खरीदी गई कार का प्रदेश के आरटीओ-डीटीओ ऑफिस में रजिस्ट्रेशन करना महंगा होने के बाद राजस्व में भारी गिरावट दर्ज की गई है। लोग भी रजिस्ट्रेशन कराने से बच रहे हैं। दाे साल पहले पुरानी काराें का रजिस्ट्रेशन कराने पर टैक्स में अधिकतम 80 प्रतिशत की छूट थी, जिसे अब 25 प्रतिशत ही कर दिया है। विभाग की ओर से टैक्स स्लैब में कमी की जाए ताे दूसरे राज्याें से खरीदी गई काराें के रजिस्ट्रेशन कराने वाले वाहनों संख्या में बढ़ोतरी हाे सकती है। इससे विभाग के राजस्व में बढ़ोतरी के साथ लाेगाें काे भी फायदा हाेगा। इससे पहले टैक्स में 50 प्रतिशत छूट हाेने पर हर साल 15400 वाहनाें का रजिस्ट्रेशन हाे रहा था। इससे हर साल करीब 75 कराेड़ रुपए का राजस्व मिल रहा था। इसके बाद छूट का दायरा बढ़ाकर 80 प्रतिशत किया ताे हर साल 50 हजार वाहनाें का पंजीयन हुअा। राजस्व भी बढ़कर 250 कराेड़ तक पहुंच गया। अब फिर से टैक्स का दायरा घटाकर 25 प्रतिशत किया ताे वाहनाें की संख्या घटकर 5 हजार रह गई और राजस्व भी 20 कराेड़ रुपए पर ही आ गया। पांच साल में 3 बार बदल गया टैक्स स्लैब विभाग दूसरे राज्यों से खरीदे जाने वाली वाहनों के टैक्स स्लैब में पांच साल में तीन बार बदलवा कर चुका है। पांच साल पहले दूसरे राज्यों की काराें के रजिस्ट्रेशन कराने पर अधिकतम 50 प्रतिशत की छूट थी। काेराना के बाद कांग्रेस सरकार ने टैक्स स्लैब में छूट काे बढ़ाकर 80 प्रतिशत कर दिया था। अब टैक्स स्लैब में अधिकतम 25 प्रतिशत तक की ही छूट कर रखी है। यह छूट हर साल 5 प्रतिशत की दर के हिसाब से अधिकतम 1 लाख के टैक्स पर 25 हजार रुपए है। यानी अब दूसरे राज्य से खरीदी गई कार का प्रदेश के आरटीओ डीटीओ में रजिस्ट्रेशन कराते हैं ताे 1 लाख रुपए के टैक्स पर 5 प्रतिशत के हिसाब से 25 हजार रुपए की छूट मिलेगी। काेराना से पहले 1 लाख के टैक्स पर 50 हजार की छूट थी। इसके बाद छूट का 8 साल पुराने वाहन पर प्रति साल 10 प्रतिशत के हिसाब से 80 हजार रुपए अधिकतम कर दिया। दूसरे राज्यों से खरीदी गई काराें के प्रदेश में रजिस्ट्रेशन कराने पर अभी हर साल विभाग काे करीब 20 कराेड़ रुपए का राजस्व आता है, लेकिन टैक्स स्लैब में छूट बढ़ाई जाए तो यह बढ़ सकता है।


