स्टांप की जालसाजी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सीकर में हाल ही फर्जी नोटेरी से बनाए गए प्लॉट के पट्टे को रद्द करने का मामला सामने आया। इसके बाद दैनिक भास्कर ने स्टांप की जालसाजी से जुड़े बड़े मामलों की पड़ताल की। सामने आया कि संबंधित अधिकारी कई मामलों में आरोपियों को बचाते रहे। इसी वजह से ज्यादातर मामले लंबे समय से पेंडिंग हैं। भास्कर ने सीकर नगर परिषद के रिकॉर्ड को खंगाला, तो नवलगढ़ रोड स्थित एक भूखंड का पट्टा फर्जी दस्तावेज से बना लिया गया। कन्हैयालाल ने दो रुपए के स्टांप पर 1999 में नोटेरी से प्लॉट की खरीद बताई। प्लॉट मालिक बनवारी लाल शर्मा की शिकायत पर नगर परिषद ने जांच कर 2024 में पट्टा रद्द किया। दो चौकाने वाले मामले सामने आए हैं। पहला केस सीकर में गुलजार मंजिल से जुड़ा है। मालिक की तलाकशुदा पत्नी ने स्टांप की कूटरचना कर बाजार भाव के हिसाब से 10 करोड़ की जमीन को फर्जी उपहार पत्र से बेच दिया। पुलिस ने जांच में मूल स्टांप प्राप्त नहीं होने का हवाला दे आरोपियों को बचाया। दूसरा मामला सरकारी विभागों में फर्नीचर सप्लाई करने वाली जयपुर की फर्म आधुनिका फर्नीचर का है। कंपनी ने एक ही स्टांप को स्कैन करने के बाद उसमें 4 अलग विभागों के ऑनलाइन टेंडर में लगा दिया। फर्म को 98 लाख रु. का टेंडर भी मिला। विभागीय जांच में स्टांप का दुरुपयोग मानते हुए स्टांप ड्यूटी और पैनल्टी वसूली टालते रहे। फर्म मालिक ने जांच अधिकारियों को जवाब दिया कि भूलवश स्टांप की स्कैन कॉपी लग गई थी। जिसे बाद में बदलकर सही लगा दी गई। पहले मामले में डीआईजी ने मानी स्टांप में कूटरचना : डीआईजी स्टांप नीरज मीणा की जांच में सामने आया कि वेंडर महेंद्र को कोष कार्यालय से जारी नॉन ज्यूडिशियल स्टांप क्रमांक 02AA508205 का विक्रय रजिस्ट्रर में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। बार-बार बुलाने पर भी वेंडर उपस्थित नहीं हुआ। जांच में माना कि रजिस्टर में विक्रय की एंट्री किए बिना स्टांप काम में लेना जालसाजी है। वेंडर का लाइसेंस निरस्त किया जा चुका है। सब रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा 6 फरवरी 2025 को कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज करवाया गया है। दूसरे मामले में डीआईजी ने स्टांप को स्कैन कर काम में लेना नियम विरुद्ध माना : प्रकरण में डीआईजी (प्रशासन) जयपुर ने जांच कर रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया कि आधुनिका फर्नीचर ने एक स्टांप को स्कैन कर अलग-अलग विभागों में पेश कर नियम विरुद्ध कार्य किया। संबंधित विभागों के स्तर पर भी लापरवाही बरतते हुए जांच नहीं की गई। फर्म ने स्टांप नंबर एवी 157820 को 6 माह की अवधि पूरी होने के बाद उपयोग में लिया। इस मामले में डीआईजी (टैक्स) संजू मीणा ने फर्म को ब्लैक लिस्ट करने के निर्देश हैं। जांच में स्टांप की बिक्री होना नहीं पाया गया। इसके बावजूद स्टांप काम में लिया जाना अपराध की श्रेणी में आता है। सब रजिस्ट्रार की ओर से स्टांप वेंडर के खिलाफ मुकदमा करवाया गया है।
-नीरज मीणा, डीआईजी स्टांप मैंने पहले जांच करवाई थी। उसके आधार पर कार्रवाई के आदेश दिए थे। अभी मेरे पास यह चार्ज नहीं है।
-संजू मीणा, डीआईजी स्टांप (टैक्स)


