कर्मपुरा बस्ती के लोग पानी और सीवरेज की सुविधा से वंचित

अमित अरोड़ा जहां एक ओर आधुनिक समय में गांव भी विकास की राह पर आगे बढ़ चुके है। वहीं मुक्तसर के नजदीक स्थित कर्मपुरा बस्ती के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पिछले करीब 30 सालों से बस्ती में पीने के पानी, सीवरेज, गलियों और नालियों जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकीं। बस्ती के सतपाल सिंह, गुरमेल सिंह और कर्मजीत कौर ने बताया कि यहां पीने के पानी की कोई पाइपलाइन नहीं है। कागजों में पाइपलाइन दिखा दी गई है, लेकिन हकीकत में लोग पानी के लिए तीन किलोमीटर दूर जाते है। जिनके पास वाहन है वे पानी ले आते हैं, जबकि कई महिलाओं को सिर पर कैनी उठाकर पैदल पानी लाना पड़ता है। आरओ से पानी भरवाने पर 20 रुपए प्रति कैनी खर्च करना पड़ता है। बस्ती में सीवरेज लाइन न होने के कारण लोग घरों का गंदा पानी रेलवे लाइन की जमीन में छोड़ने को मजबूर हैं। इस कारण रेलवे विभाग की ओर से उन्हें नोटिस देने की चेतावनी दी जाती है। बस्ती में केवल प्राइमरी स्कूल है। छठी कक्षा के बाद लड़कियों को पांच किलोमीटर दूर शहर के स्कूल जाना पड़ता है। बस्ती वासियों ने मांग की है कि स्कल को जल्द अपग्रेड किया जाए ताकि बेटियां यहीं पढ़ सकें और उन्हें दूर न जाना पड़े। बस्ती वासियों का आरोप है कि चुनाव के समय नेता वोट मांगने आते हैं और विकास के वादे करते हैं, लेकिन जीत के बाद कोई नहीं लौटता। उनका कहना है कि चार साल पहले विधायक जगदीप सिंह काका बराड़ भी बस्ती में आए थे और सुविधाएं देने का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक कोई काम नहीं हुआ। बस्तीवासियों ने आरोप लगाया कि सरकारी शौचालय नहीं बनाए गए, जिनकी ग्रांट भी सरपंच डकार गया और उन्होंने जिनके पास पैसे है। उन्होंने अपने स्तर पर शौचालय बनवाए हैं, जबकि गरीब परिवार खुले में शौच जाने को मजबूर है। उन्होंने मांग की है कि जिन घरों में शौचालय नहीं है, उन्हें जल्द ग्रांट दी जाए। सरपंच गुरजीत सिंह ने माना कि समस्या पुरानी है। समाधान के लिए प्रस्ताव डाले गए हैं और अगले महीने काम शुरू होने की उम्मीद है। शौचालयों की ग्रांट हड़पने के आरोपों को उन्होंने सिरे से नकारते कहा कि कर्मपुरा बस्ती में कोई शौचालय पास नहीं हुआ था, जबकि पास की गोबिंद नगरी बस्ती में 18 शौचालय मंजूर हुए है, जिन पर जल्द काम शुरू होगा।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *