1995 से जो सिंथेटिक ड्रग्स आए हैं, ये नेचुरल नहीं हैं, इन्होंने पंजाब की युवा पीढ़ी को बर्बाद किया

नौजवान शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए कई बार नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं। ये विचार डीएसपी नरिंदर सिंह औजला ने एक पब्लिक- पुलिस मीटिंग के दौरान व्यक्त किए। इस मौके पर करतारपुर शहर की बिजनेस कम्युनिटी को ड्रग्स के प्रति जागरूक करते हुए उन्होंने कहा कि जो मज़दूर अपनी दुकानों या खेती के कार्य में लगे हैं, उन्हें शरीर पर ड्रग्स के बुरे प्रभाव के बारे में जागरूक करना चाहिए। उनके सुझावों से राज्य में ड्रग्स के कारण बढ़ते मामलों को रोकने की संभावना बन सकती है। उन्होंने कहा कि 1995 के बाद जो सिंथेटिक ड्रग्स आए हैं, वे प्राकृतिक (नेचुरल) नहीं हैं, बल्कि इंसानी खोज का नतीजा हैं। पहले राज्य में अफीम, भुक्की और भांग का चलन था, जिसने अब सिंथेटिक ड्रग्स का रूप ले लिया है और कई कीमती जानें भी ले ली हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नशे की मानसिकता का शिकार युवा ही इलाकों में आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। आज समय की मांग है कि हम स्वस्थ समाज के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएं और युवा पीढ़ी चाहे वह मजदूर वर्ग से हो या अन्य युवा, जो ड्रग्स के कारण भटक गए हैं को सही दिशा दिखाएं। समाज और राज्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए युवाओं को नई राह देना हम सबका कर्तव्य है। इस अवसर पर करतारपुर के थाना प्रभारी रमनदीप सिंह, मनजीत सिंह, शिरोमणि कमेटी के मेंबर रणजीत सिंह काहलों, आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान सतीश गुप्ता, विजय अग्रवाल, पार्षद ओंकार सिंह मिट्ठू, पार्षद प्रिंस अरोड़ा, आप नेता वरुण बावा, ट्रेड विंग के जिला प्रधान चरणजीत सिंह पूरेवाल, जसविंदर सिंह बबला, मनु छाबड़ा, दविंदर सिंह मल्ली, भूपिंदर सिंह बिलखू, संतोख सिंह नंदरा, नेता पवन मरवाहा और योगेश कुमार भी मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने युवाओं पर ड्रग्स के दुष्प्रभावों को लेकर अपने विचार साझा किए और कहा कि वे पुलिस का सहयोग करेंगे।

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