दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के फाजिल्का आश्रम में सत्संग कार्यक्रम का करवाया, अमरा भारती और उमेश ने भजन किए प्रस्तुत

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के स्थानीय आश्रम में एक भव्य और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण विशेष सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें आशुतोष महाराज के परम शिष्य मस्तान ने संगत को आत्म-जागृति और भक्ति के मार्ग पर गहन आध्यात्मिक शिक्षाएं दीं। उन्होंने अपने प्रवचनों में बताया कि वेद, उपनिषद, श्रीमद् भगवद् गीता और अन्य धार्मिक शास्त्रों में यह स्पष्ट किया गया है कि पूर्ण गुरु की शरण में जाए बिना ईश्वर की प्राप्ति संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन बड़ी मुश्किल से मिलता है और इसका मूल उद्देश्य आत्मा को उसके वास्तविक स्वरूप से जोड़ना है। लेकिन मन के हावी होने के कारण आत्मा अज्ञानता में फंसी रहती है। जब तक मन को नियंत्रित नहीं किया जाता, तब तक सच्ची भक्ति का अनुभव नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि मन का गुलाम बनकर नहीं, बल्कि मन का मालिक बनकर जीवन को जीना ही जीवन है। आध्यात्मिक उन्नति का मूल मंत्र है। यह शक्ति पूर्ण संत की कृपा से ही मिलती है, जो आत्मा को अंदर के दिव्य प्रकाश से जोड़कर उसे असली चीज़ का अनुभव कराते हैं। गुरु की कृपा से ही अज्ञानता का अंधेरा मिटता है और जीवन में शांति और खुशी मिलती है। स्वामी जी ने यह भी बताया कि 15 मार्च को संस्थान के प्रोजेक्ट हितकारी खेती और कामधेनु गौशाला के सहयोग से किसान योद्धाओं का मार्गदर्शन करने के लिए संस्थान द्वारा डबवाली मल्को की आश्रम में एक खास कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में प्राकृतिक और जैविक खेती के फायदे, मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बचाने के तरीके और गाय आधारित खेती मॉडल के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। उन्होंने इलाके के सभी किसान भाइयों से इस फायदेमंद कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाग लेने और खेती को आत्मनिर्भर और फायदेमंद बनाने की दिशा में कदम बढ़ाने का अनुरोध किया। कार्यक्रम के दौरान साध्वी अमरा भारती और गुरु भाई उमेश ने मधुर भजन गाकर संगत को आध्यात्मिक रंग दिया। भावपूर्ण कीर्तन से पूरा आश्रम भगवान की महिमा से भर गया। गुरु और भगवान की भक्ति। यह खास सत्संग प्रोग्राम न सिर्फ आध्यात्मिक उत्थान साबित हुआ, बल्कि सामाजिक जागरूकता और किसान-हितैषी योजनाओं के लिए भी प्रेरणा साबित हुआ। फाजिल्का में आयोजित सत्संग में प्रवचन करते साध्वी तथा (दाएं) कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालु।

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