11 बार बम की धमकियां,हाईकोर्ट में 14 घंटे सुनवाई बाधित:एजेंसियां अब तक आरोपियों की पहचान में भी फेल, जानें- अब क्या है ऑप्शन

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर और जोधपुर बेंच को अक्टूबर 2025 से अब तक 11 बार बम की धमकियां मिल चुकी हैं। इन धमकियों के कारण 14 घंटे का काम प्रभावित हुआ। इससे भी ज्यादा चिंताजनक पहलू ये है कि राजस्थान पुलिस की एजेंसीज यानी एटीएस, आईबी, साइबर और इंटेलीजेंस कई बार कोशिशों के बावजूद धमकी देने वालों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। किसी भी एजेंसी के हाथ कोई सुराग नहीं लगा। भास्कर ने एक्सपर्ट से बात कर समझने की कोशिश की कि एजेंसियां क्यों नाकाम हो रही हैं और क्या विकल्प हैं, जिनके जरिए धमकी देने वालों तक पहुंचा जा सकता है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… वीपीएन के कारण धमकी वाले ईमेल का आईपी एड्रेस नहीं मिलता साइबर एक्सपर्ट मुकेश चौधरी ने बताया कि जब भी धमकी भरा ईमेल आता है तो पुलिस जांच के लिए सर्वर प्रोवाइड करने वाली कंपनी से आईपी एड्रेस के बारे में जानकारी मांगती है। जब सर्वर कंपनी खुद के सिस्टम में जांच करती है तो ई-मेल का आईपी एड्रेस सर्च नहीं हो पाता। इससे पता चलता है कि वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) से धमकी वाला ई-मेल भेजा गया है। इसके बाद पुलिस संबंधित थाने में अज्ञात के खिलाफ शिकायत दर्ज करती है। वहीं एफआईआर की एक कॉपी सेन्ट्रल एजेंसी के पास भेजी जाती है। क्योंकि बम की धमकियां सिर्फ राजस्थान नहीं कई राज्यों में आ रही हैं। आईपी एड्रेस की लीड मिल भी जाए तो 2 परेशानियां मुकेश चौधरी ने बताया कि आईपी एड्रेस की लीड मिल भी जाए तो जांच की राह आसान नहीं है। इंडिया से बाहर की टेलीकॉम कंपनी का सर्वर होता है तो उस केस में दो पॉसिबिलिटी सामने आती हैं। कोई व्यक्ति देश-विदेश में बैठ कर विदेश के सर्वर को यूज करके (वीपीएन) का यूज कर के धमकी भरे ईमेल कर रहा है। जब वीपीएन सामने आता है तो उसमें भी एक और परेशानी सामने आती है। मल्टी वीपीएन का उपयोग कर के धमकी भरे ईमेल भेजने वाले तक पहुंचने के लिए भारतीय एजेंसी को विदेश से सर्वर प्रोवाइड से मदद लेनी होती है। इसका प्रोसिजर बेहद लंबा होता है। एक ट्रीटी हो सकती है मददगार म्यूचुअल लीगल असिस्टेंट ट्रीटी दो देशों के बीच किया गया एक कानूनी समझौता होता है। इसके तहत वे आपराधिक मामलों में एक-दूसरे की कानूनी मदद करते हैं। इस समझौते के तहत अगर भारत में कोई अपराध हुआ है और उसका सबूत या आरोपी किसी दूसरे देश में है तो भारत उस देश से कानूनी सहायता मांग सकता है। इसके लिए आरोपी के खिलाफ जुटाए सबूत दूसरे देश से शेयर करने होते हैं। ये जानकारी लेने में 1 साल या उस से भी अधिक का समय लग जाता हैं। मुकेश चौधरी ने बताया कि किसी थाने या जिला पुलिस पर इस प्रोसेस को अपनाना जटिल और नामुमकिन सा हो जाता है। NIA जैसी सेंट्रल एजेंसी इसे जल्द प्रोसेज कर सकती हैं। राज्य की एजेंसियों की तुलना में NIA के लिए विदेश से डेटा मंगवाना काफी हद तक सरल है। एनआईए इन सभी राज्यों के केस को ले लेती है तो वह कुछ माह में पता कर सकती है कि कौन बार-बार थ्रेट मेल कर रहा है। सीबीआई के पोर्टल भारत पोल से मिल सकती है मदद देश के राज्यों में निरंतर मिल रही धमकी को देखते हुए एजेंसी चाहे तो सीबीआई के पोर्टल भारत पोल से भी मदद ले सकती हैं। इसके माध्यम से विदेश में बने हुए पैनल तक शिकायत पहुंचती है। इसके बाद उस पर जल्द एक्शन होनी की संभावना मानी जा सकती हैं। राज्यों की एजेंसी लगातार मिल रही धमकियों का रिकॉर्ड तैयार कर के सीबीआई को भेजे तो यह शिकायत भारत पोल के माध्यम से विशेष एजेंसियों को मिल जाएगी और उस पर एक्शन होगा। एनआईए, सीबीआई भी कर रही काम : डीआईजी साइबर डीआईजी साइबर शांतनु कुमार ने बताया कि राजस्थान में अब तक जो भी धमकी भरे ईमेल आए, उन्हें लेकर हमारी टीम कई बार दिल्ली गई। सेंट्रल एजेंसीज एनआईए, सीबीआई को जानकारी दी। वे अपने स्तर पर इस पर काम कर रहे हैं। सेन्ट्रल एजेंसी जो भी जानकारी मांगती हैं, उन्हें प्रोवाइड करा दी जाती है, लेकिन सच्चाई यह है कि अब तक हम लोग मेल करने वाले तक नहीं पहुंचे हैं। खराब हो रहा कोर्ट का समय : सोगरवाल राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल ने बताया कि बार-बार मेल पर मिल रही धमकियों से कोर्ट का समय बहुत खराब हो रहा है। हाईकोर्ट जयपुर पीठ और जोधपुर में करीब 14 घंटे से अधिक समय सुनवाई बाधित रही। वहीं सैकड़ों वकील,पक्ष और विपक्ष के सैकड़ों लोग और जजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *