कैग की पड़ताल- मप्र में सड़कों की सतह ज्यादा ऊबड़-खाबड़…:इंदौर-उज्जैन, जावरा-नयागांव और भोपाल से देवास के बीच ज्यादा हादसों की यही बड़ी वजह

मप्र की खराब सड़कें दुर्घटनाओं की वजह बन रही हैं। कैग की जांच में प्रदेश में कई नेशनल-स्टेट हाईवे और टोल सड़कों पर रफनेस इंडेक्स तय मानकों से काफी ज्यादा पाया गया है। कैग ने हालिया रिपोर्ट में इसे रेखांकित किया है और एजेंसियों को हिदायत दी है कि इन सड़कों को मानकों के अनुरूप किया जाए। दरअसल, इंडियन रोड कांग्रेस ने सड़कों की गुणवत्ता के लिए मापदंड तय किए हैं। इसके अनुसार राष्ट्रीय राजमार्गों पर रफनेस इंडेक्स 1800 मिलीमीटर प्रति किलोमीटर से कम और राज्य मार्गों पर 2000 एमएम प्रति किमी से कम होना चाहिए। तभी सड़क सुरक्षित मानी जाती है। इसका मतलब है कि हर किमी में सड़क इतनी स्मूथ हो कि झटके तय सीमा से अधिक न हों। रफनेस इंडेक्स 3000 एमएम तक पहुंचता है तो दुर्घटनाओं की आशंका काफी बढ़ जाती है। लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, मप्र में 2022 में सड़क हादसों में 13427 और 2023 में 13798 लोगों की मौत हुई। 2024 में ये संख्या 14791 हो गई। यानी हादसे बढ़ रहे हैं। 13 टोल रोड पर भी तीन साल में 2846 लोगों की मौत, यहां रफनेस इंडेक्स 3900 एमएम प्रति किमी तक
सड़कें बिगड़ती रहीं, मेंटेनेंस ही नहीं
कैग की टेक्निकल टीम ने मप्र की सड़कों की जांच की। इनमें रफनेस इंडेक्स 2750 से लेकर 3000 एमएम प्रति किमी तक पाया गया। इंदौर-2 परियोजना की सड़कों में यह सूचकांक काफी ज्यादा था। इससे साफ हुआ कि सड़कें समय के साथ खराब होती रही, लेकिन संचालन अवधि के दौरान ओवरले नहीं किया गया। इनमें टोल रोड भी शामिल हैं। निर्माण कंपनियों का तर्क था कि 2000 एमएम प्रति किमी रफनेस इंडेक्स केवल नवनिर्मित सड़क के लिए है। लंबे समय उपयोग से यह 3000 एमएम तक पहुंच सकता है। हालांकि जांच एजेंसी ने ये दलील मंजूर नहीं की। एक्सपर्ट व्यू : ऐसे मापते हैं रफनेस
रफनेस इंडेक्स मापने के लिए लेजर प्रोफिलोमीटर का उपयोग किया जाता है। ये एक वाहन पर लगा होता है और एक साथ कई लेजर बीम सड़क की सतह पर फेंकता है। ये बीम सड़क के हर उभार और गड्डे से टकराकर वापस आते हैं। बीम के जाने और वापस आने में लगे समय को मापकर डिवाइस सड़क के हर बिंदु की सटीक ऊंचाई और क्षैतिज स्थिति निर्धारित करता है। इस डेटा को एक डिजिटल प्रोसेसिंग यूनिट में भेजा जाता है और विश्लेषण कर रफनेस इंडेक्स की गणना की जाती है। डॉ. राहुल तिवारी, प्राध्यापक, परिवहन नियोजन, मैनिट औचक निरीक्षण कर सड़कों की गुणवत्ता चेक की जा रही है। इसमें रफनेस इंडेक्स भी देखा जा रहा है, जहां भी खामी पाई जा रही है, ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट किया गया है। अधिकारियों को भी नोटिस दिए गए हैं। जहां भी खामी है, सुधार करवा रहे हैं। -राकेश सिंह, पीडब्ल्यूडी मंत्री

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