कोटा सेंट्रल जेल में बंदियों के पुनर्वास को लेकर एक सराहनीय पहल देखने को मिल रही है। जेल सुपरिंटेंडेंट भैरू सिंह राठौड़ के निर्देशन में व्यापक साक्षरता अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत निरक्षर बंदियों को पढ़ना-लिखना सिखाया जा रहा है। जो बंदी पहले अपना नाम तक नहीं लिख पाते थे, वे आज अपना नाम लिखने के साथ-साथ अखबार पढ़ने में भी सक्षम हो गए हैं। जेल प्रशासन द्वारा दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई के साथ कंप्यूटर प्रशिक्षण की भी नियमित कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। जेल की कंप्यूटर लैब और पुस्तकालय में लगातार क्लास लग रही हैं, जहां कई बंदी कंप्यूटर चलाना सीख रहे हैं। सरकार की ओर से चलाए जा रहे विभिन्न शैक्षणिक कोर्स का लाभ भी बंदियों को दिया जा रहा है। डिप्टी सुपरिंटेंडेंट रोहित कौशिक ने बताया कि जेल में इग्नू और एनआईओएस के कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। वर्ष 2025 में इग्नू के तहत 141 बंदियों का नामांकन किया गया, जिनमें से 47 बंदियों ने परीक्षा दी। जनवरी 2026 में जून सत्र के लिए 109 बंदियों का सीएफएन कोर्स में नामांकन कराया गया है। इग्नू कार्यक्रम वर्ष में जून और दिसंबर माह में संचालित होते हैं। इसी प्रकार एनआईओएस के तहत दिसंबर 2025 में 32 बंदियों का नामांकन हुआ, जिनमें 31 दसवीं और एक बारहवीं कक्षा में शामिल है। वर्ष 2026 में 35 बंदियों का नामांकन कराया गया है, जिनमें 33 दसवीं और 2 बारहवीं कक्षा में अध्ययनरत हैं। इनकी परीक्षा अप्रैल में आयोजित होगी। साक्षरता अभियान के तहत वर्ष 2024 में 491 निरक्षर बंदियों को साक्षर किया गया। वर्ष 2025 में 564 बंदियों को पढ़ना-लिखना सिखाया गया, जबकि 2026 के जनवरी और फरवरी माह में 52 बंदी साक्षर किए जा चुके हैं। वर्तमान में 53 बंदियों की कक्षाएं जेल पुस्तकालय में नियमित रूप से चल रही हैं। यह पहल बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही हैं।


