राजस्थान में पहले जोधपुर और अब बाड़मेर को तस्करों में ड्रग का हब बनाना शुरू कर दिया है। डोडा-चूरा की तस्करी को छोड़ अब पश्चिमी राजस्थान के तस्कर MD ड्रग की तस्करी में शिफ्ट हो रहे हैं। पुलिस की जांच में सामने आया कि वहीं तस्कर जो पहले डोडा चूरा ले जाते थे, उन्होंने के गुर्गे और साथी MD तस्करी, फैक्ट्री बनाने और जगह देने में पकड़े जा रहे हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि डोडा-चूरा में कम कमाई के कारण तस्कर अब MD की तरफ शिफ्ट हो गए हैं। जांच में यह भी सामने आया की ये MD महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली समेत राजस्थान के शहरों में युवाओं तक आसानी से पहुंचाई जा रही है। वहीं ये तस्कर नए युवाओं को आगे कर रहे हैं, रुपयों का लालच देकर उन्हें MD ड्रग बनाने और अपने एरिया में फैक्ट्री डालने का लालच दे रहे हैं। पढ़िए 2 साल में बॉर्डर एरिया कैसे बना MD ड्रग का हब डोडा-पोस्त तस्करों ने अपना ट्रेंड बदल दिया है। पहले एमपी, चितौड़गढ़ से लाकर पश्चिमी राजस्थान में सप्लाई करते थे। लेकिन अब तस्कर डोडा, अफीम छोड़कर सरहदी इलाके बाड़मेर में एमडी ड्रग्स की फैक्ट्री लगा रहे हैं। बाड़मेर ही क्यों? एक्सपर्ट बताते बताते हैं- जोधपुर में नारकोटिक्स विभाग ने बहुत हद तक MD की तस्करी को डेंट दिया था। इसके बाद बाड़मेर से गुजरता भारतमाला हाईवे तस्करों के लिए गोल्डन रूट बना हुआ है। ये राजस्थान से गुजरात और मुंबई तक जाता है। ऐसे में, तस्कर 3 राज्यों में सड़क मार्ग के जरिए सप्लाई पहुंचा रहे हैं। जो गुजरात, राजस्थान और पंजाब को कनेक्ट करता है। वहीं गुजरात से मुंबई पहुंचना आसान है। इसी भारतमाला हाईवे से केमिकल मुंबई से लेकर आते है। वहीं यहां पर एमडी बनाकर इसी रास्ते से इसको गुजरात और मुंबई तक सप्लाई करते है। रेतीले धोरे और सुनसान इलाका एक्सपर्ट बताते हैं- भौगोलिक स्थिति देखें तो बाड़मेर का इलाका धोरों से घिरा है। यहां अब तक 6 फैक्ट्रियां पकड़ी जा चुकी हैं। सभी फैक्ट्रियां ऐसी जगह थी जहां कार का जाना नामुमकिन है। कहीं बाड़े को पेड़ से ढका था तो कहीं मुर्गी फार्म पर ये फैक्ट्रियां चलाई जा रही थी। पुलिस और एएनटीएफ की टीमों ने पश्चिमी राजस्थान में फरवरी महीने में 6 एमडी फैक्ट्री को पकड़ी जा चुकी है। जिसमें 5 बाड़मेर और 1 जालोर जिले में पकड़ी जा चुकी है। पुराने तस्कर नए लड़कों को आगे कर रहे एसपी नरेंद्र सिंह मीना ने बताया- हमने पुराने तस्करों की मार्किंग करके लिस्ट बना दी है। बीट प्रभारी को एक्टिव कर दिया है। बाड़मेर में लगाने के पीछे वजह कि बॉर्डर से गुजरात नजदीक है। पश्चिमी राजस्थान इस मामले में इसमें एडंवास है। ये तस्कर पहले डोडा-पोस्त के धंधे में लिप्त थे। यहां के युवाओं की बहुत जल्दी पैसा वाला बनने की ललक है। ऐसे में, नए लड़कों को आगे रखकर पुराने तस्कर MD की तस्करी में शामिल हो गए हैं। सुनसान इलाकों में घूमेंगे बीट प्रभारी एसपी मीना ने कहा- बाड़मेर में MD की मैन्युफैरिंग रोकने के लिए बीट प्रभारी को मजबूत कर रहे हैं। ये लोग एरिया में जाकर घूमेंगे और ऐसी जगहें देखेंगे जो सुनसान हों और जहां जाना भी मुश्किल हो। पिछली फैक्ट्रियों की निशादेही पर ही अन्य फैक्ट्रियां भी ढूंढी जाएंगी। रेगिस्तान का एरिया दूर-दूर है। जगह-जगह धोरें है। वहां पर कोई 6-10 साल में वहां पर कोई नहीं गया। हमने नीचे की कड़ी को मजबूत किया है। 2 माह में बाड़मेर में 5 ड्रग्स फैक्ट्री पकड़ी जालोर में 5 माह चली फैक्ट्री चलाई एएनटीएफ व स्थानीय पुलिस ने 27 फरवरी को जालोर जिले के बागौड़ा के बावड़ी गांव से एमडी बनाने की अत्याधुनिक उपकरणों से लैंस फैक्ट्री पकड़ी। मौके से 400 लीटर कैमिकल और फैक्ट्री के संसाधन बरामद किए है। ओमप्रकाश 5 माह पहले गावड़ी में फैक्ट्री लगाई थी। 4 माह पहले ड्रग बनाना शुरू किया। इन 4 माह में 120 किलो ड्रग बनाकर बाजार में खपा चुका था। उसका फिक्स पैटर्न था कि वह हर 10 दिन में 10 किलो एमडी ड्रग्स ही तैयार करता था। उसे राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र में हैंडलरों के जरिए खपाता था।


