स्वर्ण नगरी में होली के उल्लास के बीच श्री ब्रह्मक्षत्रिय खत्री समाज द्वारा अपनी सदियों पुरानी परंपराओं का भव्य निर्वाह किया गया। समाज की ओर से होली के दूसरे दिन पारंपरिक फाग गैर निकाली गई, जिसमें भक्ति, संस्कृति और आपसी भाईचारे का अनूठा संगम देखने को मिला। चंग की थाप और फागणिया गीतों की गूंज ने पूरे खत्री पाड़ा को होली के रंगों से सराबोर कर दिया। फागोत्सव का मुख्य आयोजन रतासर स्थित मां हिंगलाज मंदिर प्रांगण में हुआ। यहाँ समाज के लोगों ने एकत्रित होकर एक-दूसरे का मुंह मीठा करवाया और ‘रामा-श्यामा’ कर होली की शुभकामनाएं दीं। इसके पश्चात गुलाल और अबीर के साथ फागोत्सव मनाया गया। मां हिंगलाज के जयकारों के बीच पूरा वातावरण धर्ममय और रंगीन हो गया। गली-गली गूंजे चंग और फाग के स्वर समाज की पारंपरिक गैर खत्री पाड़ा से गाजे-बाजे के साथ रवाना हुई। हाथों में चंग थामे गेरिये जब फाग गाते हुए निकले, तो दृश्य अत्यंत मनमोहक था। यह गैर समाज के विभिन्न मोहल्लों से गुजरी, जहाँ हर घर के आगे रुककर पारंपरिक भजन और फाग गाए गए। मोहल्लेवासियों ने भी उत्साह दिखाते हुए घरों से बाहर आकर गेरियों का स्वागत किया, उन्हें मिठाई खिलाई और गुलाल लगाकर स्नेह व्यक्त किया। युवाओं ने उठाई परंपरा को जीवित रखने की जिम्मेदारी गैर में शामिल गेरिये खेमचंद खत्री ने बताया कि चंग की थाप खत्री समाज की होली की असली पहचान है। उन्होंने हर्ष व्यक्त किया कि अब समाज के युवा इस पुरानी परंपरा को जीवित रखने के लिए आगे आ रहे हैं। विगत कुछ वर्षों से युवाओं ने चंग के साथ फाग गायन का बीड़ा उठाया है, जिससे लोकस्वर और संस्कृति संरक्षित हो रही है। एकता और सद्भावना का संदेश गैर का समापन हिंगलाज मंदिर के आगे मां हिंगलाज की सामूहिक आरती के साथ हुआ। इस अवसर पर खत्री समाज जैसलमेर के अध्यक्ष श्री सत्यनारायण दड़ा ने उपस्थित सभी समाज बंधुओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह महापर्व समाज में एकता, रंग, उमंग और सद्भावना का संचार करता है। आयोजन में समाज के पदाधिकारी, कमेटी सदस्य, युवा और बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेकर होली के उत्साह को दोगुना कर दिया।


