एथेनाॉल मिक्सिंग के नाम पर छले गए किसान:सरकार की अपील पर किसानों ने लगाई मक्का, MSP पर खरीद नहीं हुई, मंडी में आधे रेट मिले

केंद्र सरकार की नीति है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक ए​थेनॉल मिक्स किया जाए, ताकि ईंधन के लिए विदेशों पर निर्भरता कम हो। इसके लिए किसानों से कहा गया कि ज्यादा से ज्यादा मक्का उगाएं। केंद्र ने मक्का का समर्थन मूल्य 8 प्रतिशत बढ़ाकर 2400 रुपए प्रति क्विंटल तय किया। तेल कंपनियों ने भी मक्का से बने एथेनॉल के लिए प्रति लीटर 5.79 रुपए तक बोनस की घोषणा की। नतीजा ये कि मप्र में एक साल में मक्का का रकबा 7 लाख हेक्टेयर से ज्यादा और उत्पादन 21 लाख मीट्रिक टन बढ़ गया। लेकिन, जब बेचने की बारी आई तो किसानों की लागत भी नहीं निकल पाई। समर्थन मूल्य खरीदी तो हुई ही नहीं, मंडियों में भी औसत दाम 1500 से 2000 तक रहे। यानी न सरकार से समर्थन मिला और न बाजार से। कुछ हफ्तों पहले मांग बहुत कम होने से मालवा-निमाड़ की दूरदराज मंडियों में दाम 1100 रुपए प्रति क्विंटल तक हो गए थे, जबकि इसकी लागत ही करीब 1500 रु. प्रति क्विंटल है। अब किसान खुद को छला हुआ महसूस कर रहे हैं। जिस सरकार के कहने पर उत्पादन बढ़ाया, वही अब खरीद न करने के तमाम कारण गिना रही है। मप्र में करीब 85 लाख किसान हैं, इनमें 15 लाख से अधिक मक्का उगाते हैं। विडंबना… 2400 रु. त​य किया था एमएसपी, मंडियों में 1100-1200 का भाव इसलिए भाव कम इस साल उत्पादन बंपर हुआ है, वहीं कैटल फीड और एथेनॉल के लिए मांग नहीं रही। एथेनॉल में मक्का की जगह सस्ते विकल्प (टूटे चावल) का उपयोग हो रहा है। वैश्विक डिमांड भी कम रही, इसलिए दाम गिरे। 2024 में 2100-2200 रु. दाम मिले थे जबकि 2023 में 1800-1900 तक दाम थे। 2021 -22 कोरोना काल में मक्का लेकर एक्सपोर्ट कराया गया था। 2017 -18 में दाम गिरने पर भावांतर के जरिये भरपाई की गई थी। कृषि मंत्री से सवाल किया तो साधी चुप्पी भास्कर ने कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना से सवाल किए- कई फसलों के लिए भावांतर के प्रस्ताव केंद्र को भेजे गए थे। इनमें मक्का भी शामिल था क्या?
जवाब-मक्का के लिए प्रस्ताव नहीं बना। नुकसान हुआ तो खरीदेंगे। रेट काफी कम रहे हैं, सरकार ने भी एथेनॉल के लिए मक्का को बढ़ावा दिया था? इस पर मंत्री बिना जवाब दिए आगे बढ़ गए। बीते साल मक्का का समर्थन मूल्य 2225 रु. था जो अब 2400 है। स्वामीनाथन कमेटी की अनुशंसाओं के मुताबिक लागत प्रति क्विंटल 1508 रु. है, यानी समर्थन मूल्य से खरीदी पर 59% मुनाफा मिलेगा, पर इसके उलट 55% तक कम दाम किसानों को मिले। धार, खरगोन, खंडवा जैसे कई जिलों में 1100-1200 रुपए तो नर्मदापुरम, सीहोर में 1200 से 1500 रुपए प्रति क्विंटल तक फसल बिकी। किसानों की मानें तो प्रति एकड़ लागत ही 27 से 28 हजार रही। औसत रूप से प्रति एकड़ लगभग 13 हजार घाटा हुआ। लागत से भी कम दाम पर बिका है मक्का, यूएस से ट्रेड डील पूरी तरह बर्बाद कर देगी
न तो मक्का खरीदी समर्थन मूल्य पर हुई, न ही एथेनॉल कंपनियों ने इसमें खरीदी में रुचि ली। ज्यादातर समय मक्का लागत से भी नीचे यानी 1500 से कम दाम पर बिका। जबकि सरकार ने भी किसानों से सोयाबीन की जगह मक्का लगाने को कहा था। व्यापारी मुनाफे में रहे। अमेरिका से ट्रेड डील में मक्का उत्पादों पर छूट है, इससे तो किसान कहीं के नहीं रहेंगे।
कमल सिंह आंजना, मध्य भारत प्रांत अध्यक्ष भारतीय किसान संघ समर्थन मूल्य से आधे रेट पर बिका, मालवा-निमाड़ में तो 800-900 रुपए भाव ही मिले
मालवा निमाड़ के जिलों में तो मक्का 800 से 900 रुपए तक बिका। एक साल से समर्थन मूल्य से आधे दामों में बिक रहा है। अब ट्रेड डील से अमेरिका से अगर सस्ता कैटल फीड भारत में आएगा तो मक्का किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे। हालांकि, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज ने हाल में दावा किया था कि गेहूं, मक्का और डेयरी उत्पाद अमेरिका से नहीं आने दिए जाएंगे। केदार सिरोही, कार्यकारी अध्यक्ष कांग्रेस किसान प्रकोष्ठ

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