कोंडागांव के पासंगी में अंगारों पर चलने की परंपरा:ग्रामीण सुख-समृद्धि के लिए निभाते हैं अनोखी आस्था, सालों से बनी हुई है गांव की पहचान

कोंडागांव जिले के नगर पंचायत फरसगांव के पासंगी गांव में होली का पर्व रंगों के साथ-साथ एक अनूठी परंपरा के लिए भी जाना जाता है। यहां होलिका दहन के बाद ग्रामीण सुख-समृद्धि की कामना के साथ नंगे पांव अंगारों पर चलते हैं। यह परंपरा सालों से गांव की पहचान बनी हुई है। इस साल भी गांव के गणमान्य नागरिकों, पुजारी, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की उपस्थिति में पारंपरिक रीति-रिवाजों से होलिका दहन किया गया। सबसे पहले ग्राम देवता भीमा देव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद ग्रामीण जंगल से लकड़ियां लाकर देव स्थल पर एकत्र करते हैं। पूजा के बाद इन लकड़ियों से होलिका सजाकर मंत्रोच्चार के साथ अग्नि प्रज्वलित की जाती है। लकड़ियां पूरी तरह जलकर अंगारों में बदलने के बाद अंगारों पर चलने की परंपरा शुरू होती है। गांव के बुजुर्ग, युवा और बच्चे भी नंगे पांव इन अंगारों पर चलते हैं। परंपरा से सुख-शांति और एकता ग्रामीणों का मानना है कि इस परंपरा से गांव में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है तथा सभी बाधाएं दूर होती हैं। यह परंपरा उनके पूर्वजों के समय से चली आ रही है और आज भी उसी आस्था के साथ निभाई जाती है। इस आयोजन में पूरा गांव एकजुट होकर भाग लेता है, जिससे आपसी भाईचारा और सामाजिक एकता मजबूत होती है। संस्कृति की अनूठी मिसाल आधुनिक समय में जहां कई परंपराएं लुप्त हो रही हैं, वहीं पासंगी गांव की यह अनूठी परंपरा आज भी जीवित है। यह आयोजन न केवल धार्मिक विश्वास का प्रतीक है, बल्कि ग्राम संस्कृति और सामूहिक एकता की मिसाल भी प्रस्तुत करता है।

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