पंजाब से आने वाली इंदिरा गांधी मुख्य नहर में साफ-सफाई और मरम्मत कार्य के चलते होने वाली आगामी नहरबंदी को लेकर नागौर जिले में जलदाय विभाग ने कमर कस ली है। नहरबंदी के दौरान पेयजल संकट से निपटने के लिए विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं ताकि दोनों जिले के 13 शहरों और 1616 गांवों में जलापूर्ति प्रभावित न हो। पंजाब के फिरोजपुर फीडर के पुनर्निर्माण और नहर के मरम्मत कार्य के लिए 20 मार्च से 3 मई तक नहर बंदी की घोषणा फिलहाल की गई है जिसे 60 दिन तक भी बढ़ाया जा सकता है।
नहरी परियोजना के अधीक्षण अभियंता पी.एस. तंवर ने बताया कि विभाग का मुख्य फोकस नोखा दैया डेम में जल भंडारण पर है, जहां वर्तमान में 10 हजार मिलियन लीटर से ज्यादा पानी एकत्रित किया जा चुका है। डेम की कुल क्षमता 10,110 एमएलडी है, जो बंदी के दौरान जिले की प्यास बुझाने में मुख्य भूमिका निभाएगा।
नहरी पानी के स्टॉक के साथ-साथ विभाग ने स्थानीय जल स्रोतों को भी सक्रिय करना शुरू कर दिया है। जिले के सभी नलकूपों और हैंडपंपों को चिह्नित कर उनकी जांच के निर्देश दिए गए हैं ताकि आपात स्थिति में उनका पूर्ण उपयोग किया जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवस्थाएं संभालने के लिए विशेष टीमें जोनवार तैनात की गई हैं, जो हैंडपंपों की मरम्मत और नलकूपों के संचालन की निगरानी करेंगी। नागौर जिले के 843 गांवों में स्थित 22 हजार से अधिक जल कनेक्शनों पर सुचारु आपूर्ति बनाए रखना विभाग के लिए बड़ी चुनौती है, जिसके लिए नलकूपों और डेम के पानी का समन्वय बैठाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि नहरबंदी के दौरान आमजन को परेशानी न हो, इसके लिए विभाग पूरी तरह मुस्तैद है और सभी संसाधनों को व्यवस्थित किया जा रहा है। नागौर जिले में 843 गांवों में नहरी पानी सप्लाई होता है जबकि डीडवाना कुचामन के 773 गांवों को इंदिरा गांधी नहर का पानी सप्लाई किया जाता है।
30 दिन की भराव क्षमता 45 दिन तक रहेगी नहरबंदी बीकानेर के नोखा दैया में स्थित डेम में नागौर और डीडवाना जिलों में सप्लाई के लिए 30 दिन सप्लाई होने जितना पानी स्टोर है । लेकिन नहर बंदी 45 दिन की रहेगी और इसे आवश्यकता पड़ने पर 60 दिन भी किया जा सकता है। दोनों ही जिलों में वर्तमान में तीन से चार दिन छोड़कर पानी सप्लाई किया जाता है । डीडवाना कुचामन जिले में तो कई एरिया में यह स्थिति 7 दिन तक भी पहुंच जाती है । ऐसे में विभाग के पास सबसे बड़ा चैलेंज यही है कि गांवों में सप्लाई को कैसे सुचारू रखा जाए ।


