भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा नक्सल उन्मूलन की तय डेडलाइन नजदीक आने के बीच सोमवार को दंतेवाड़ा में पुलिस महकमे की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में डीजीपी अरुणदेव गौतम, एडीजी विवेकानंद सिन्हा समेत सात जिलों के एसपी मौजूद रहे। साथ ही केंद्रीय सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। करीब तीन घंटे चली इस बैठक में नक्सल विरोधी अभियानों की प्रगति, खुफिया तंत्र की मजबूती और आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में बीते महीनों में चलाए गए ऑपरेशन की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि तय समय सीमा के भीतर नक्सल को खत्म करना है। सीमावर्ती इलाकों में संयुक्त ऑपरेशन तेज करने, अंतरराज्यीय समन्वय बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। विशेष रूप से संवेदनशील इलाकों में एरिया डोमिनेशन और सर्च ऑपरेशन को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए। बैठक में तकनीकी संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी जोर रहा। ड्रोन सर्विलांस, आधुनिक संचार उपकरण और स्थानीय स्तर पर मुखबिर तंत्र को मजबूत करने की रणनीति तैयार की गई। अधिकारियों ने कहा कि ग्रामीणों का विश्वास जीतना अभियान की सफलता की कुंजी है। इसके लिए सिविक एक्शन प्रोग्राम और जनसंवाद बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। सात जिलों के एसपी ने अपने-अपने क्षेत्रों की स्थिति की जानकारी दी। पुलिस की यह उच्च स्तरीय बैठक पूरी तरह गोपनीय रही। बैठक के बाद पुलिस अफसर दंतेश्वरी माता के दर्शन को मंदिर पहुंचे। संभाग में अब बचे गिनती के नक्सली: बस्तर संभाग के सात जिलों में से अब बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और दंतेवाड़ा में थोड़े-बहुत नक्सली बचे हैं। दंतेवाड़ा में सिंगल डिजिट में, तो सुकमा, बीजापुर में 20 से कम और इतनी ही संख्या में नारायणपुर में नक्सली बच गए हैं। सबसे ज्यादा चुनौती अबूझमाड़ में थी, जहां से अब नक्सलियो का पूरी तरह खात्मा हो चुका है। एक डीवीसीएम बीरू के साथ कुछ नक्सली बचे हैं। बीजापुर में नक्सलियो की संख्या कम है पर पापा राव जैसे बड़े नेता की मौजूदगी बड़ा चैलेंज है।


