बैकुंठपुर | इस वर्ष होली पर्व पर चंद्र ग्रहण के प्रभाव के चलते जिले भर में अपेक्षित उत्साह देखने को नहीं मिला। ज्योतिषीय मान्यताओं और सूतक काल की परंपराओं के कारण जिले में होली का गणित बदला नजर आया। ग्रहण के दोष से बचने के लिए कई स्थानों पर होलिका दहन का समय बदला गया, जिससे उत्सव दो हिस्सों में बंट गया। जिले के कई मोहल्लों और गांवों में ज्योतिषीय गणना को मानते हुए 2 मार्च की रात ही विधि-विधान से होलिका दहन कर दिया गया। लोगों ने अबीर-गुलाल उड़ाकर पर्व की औपचारिक शुरुआत की। वहीं, दूसरी ओर कई स्थानों पर 3 मार्च की रात होलिका दहन किया गया, जिसके चलते अब इन क्षेत्रों में 4 मार्च को रंगोत्सव (रंग पंचमी) मनाने का निर्णय लिया गया है। एमसीबी जिले के चिरमिरी शहर में सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने अपनी परंपराओं का निर्वहन किया। चिरमिरी के बड़ा बाजार स्थित योगा मैदान में ओम योगा समिति द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होलिका दहन किया गया। समिति के पदाधिकारियों ने अग्नि प्रज्वलित कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने दहन के बाद एक-दूसरे को गुलाल लगाकर बधाई दी। शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रशासन ने जिले वासियों से अपील की है। ग्रहण का प्रभाव समाप्त होने के बाद 4 मार्च को रंग पंचमी के अवसर पर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में रंगोत्सव की असली रौनक देखने को मिलेगी।


