JNVU के पेंशनर्स की तीन महीने से पेंशन बकाया:हर माह करीब 8.70 करोड़ की पेंशन चुकाई जाती है, साल का 100 करोड़ का खर्चा

जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में करीब 1475 पेंशनर्स की तीन महीने की पेंशन एक बार फिर बकाया हो गई है। पेंशनर को नवंबर से ही पेंशन नहीं मिली, जिसको लेकर पेंशनर्स ने धरना प्रदर्शन भी किया था। पेंशनर्स ने होली से पहले पेंशन जारी करने की मांग की थी। इसके बाद हरकत में आए विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुक्रवार को पेंशनर्स की एक माह की पेंशन जारी की। अब पेंशनर्स की दिसंबर, जनवरी और फरवरी की पेंशन बकाया है। विश्वविद्यालय के पेंशनर्स को प्रति महीने करीब 8.70 करोड़ की पेंशन चुकाई जाती है, ऐसे में अब तीन महीने की करीब 26.10 करोड़ की पैंशन बकाया हो गई है। सालाना पेंशन करीब 100 करोड़ रुपए बैठती है। आराम करने की उम्र, करना पड़ रहा आंदोलन पेंशनर सोसाइटी के संयोजक अशोक व्यास ने कहा- तीन माह की पेंशन बकाया है। इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की गंभीरता हमें नजर नहीं आती है। स्थानीय विधायकों, सिंडीकेट मेंबर और राज्यपाल से मिले हैं। सरकार से भी उम्मीद है कि सभी विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स के हित में कदम उठाएगी। जिस उम्र में हमें घर पर आराम करना चाहिए, उस उम्र में धरना-प्रदर्शन कर आंदोलन करना पड़ रहा है। करीब 5 माह पहले पेंशन के लिए 92 दिन का धरना दिया। 11 और 12 फरवरी को दो दिन धरना दिया। अब नवंबर माह की पेंशन दी गई है। दिसंबर, जनवरी और फरवरी की पेंशन बाकी है। उन्होंने बताया कि करीब तीन साल पहले पेंशन की समस्या शुरू हुई। पहले महीने-दो महीने में ही बकाया पेंशन मिल जाती थी, लेकिन अब तो यह बढ़कर तीन से चार माह हो चुकी है। विश्वविद्यालय की आय कम हो रही है। ऐसे में सरकार से मांग है कि राज्य सरकार के कर्मचारियों की भांति पेंशन दी जाए। पेंशन चुकाने के लिए चाहिए एक हजार करोड़ के कॉर्पस फंड वहीं, विश्वविद्यालय के कुलगुरु पवन कुमार शर्मा ने बताया- विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थिति से सरकार को अवगत कराया जा रहा है। पेंशनर की सालाना पेंशन करीब 100 करोड़ है। इसके लिए 1000 करोड़ का कॉर्पस फंड होना चाहिए। पिछले 10-15 साल एक्मूलेड इंपैक्ट में ये फंड जनरेट नहीं हो पाया। इसलिए बिना कॉर्पस फंड के इंटरेस्ट के विश्वविद्यालय पेंशन देने की स्थिति में नहीं है। राज्य सरकार अन्य कर्मचारियों की तरह खुद दे पेंशन इसके दो समाधान नजर आते हैं। एक तो जैसे कॉलेज या अन्य राजकीय संस्थानों ने वेतन दिया जा रहा है, पेंशन दी जा रही है। जिस प्रकार हमारा वेतन पीडी अकाउंट से मिलता है, वैसे ही पेंशन दी जाए। यह सरकार स्तर पर संभव है। विश्वविद्यालय अपने स्तर एक वित्तीय संसाधन जैसे सेल्फ फाइनेंस कोर्सेज को बढ़ाकर वित्तीय स्थिति मजबूत कर सकता है। लेकिन यह दीर्घकालीन प्रयास रहेगा। इसके लिए सरकार का भी सहयोग जरूरी होगा। सरकार की स्कीम चलाई जा रही है। जैसे आरक्षित फ्री शिक्षा की बात है या फिर महिला वर्ग से फीस नहीं लेने की बात की गई है। इसका कंपनसेशन सरकार हमें दे दे तो विश्वविद्यालय के संसाधन बढ़ जाएंगे। ये बात सरकार के संज्ञान में है और सरकार अपने स्तर पर इस पर चर्चा कर रही है। पर विवि को अपने स्तर पर अपने संसाधन बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। विवि ने कई सेल्फ फाइनेंस कोर्स आने वाले सत्र से शुरू कर रहा है, जिससे रेवन्यू जनरेट होने की संभावन रहेगी। यह लंबे समय का परिणाम जिससे पेंशन की समस्या हो रही है। इसके समाधान में और समय लग सकता है। लेकिन सरकार , विवि और कम्युनिटी के बिहाफ पर इसका समाधान सामूहिक रूप से निकाला जा सकता है।
कुलगुरु से हुई थी धक्का-मुक्की पेंशनर्स सोसाइटी के नेताओं की 23 दिसंबर को कुलगुरु पवन कुमार शर्मा से धक्का मुक्की हो गई थी। इस धक्का मुक्की में कुलगुरु पवन कुमार शर्मा गिर पड़े थे। उनके हाथ और पांव में फ्रैक्चर हो गया था। दरअसल, जय नारायण विश्वविद्यालय के हेड ऑफिस में पब्लिक रिलेशन ऑफिस के पास में ही पेंशनर्स सोसायटी को एक कमरा मिला हुआ था, जहां वे बैठक करते थे। कुलगुरु पवन कुमार शर्मा ने सोसाइटी से इस कमरे को वापस ले लिया और वहां लॉक लगवा दिया। इसके बाद समिति पदाधिकारी ने मासिक बैठक के लिए वाचस्पति भवन में जगह की मांग की। इसी मुद्दे को लेकर समिति के पदाधिकारी उस दिन कुलगुरु से मिलने पहुंचे थे। बातचीत के दौरान यह यह झड़प हो गईं थी। वहीं सोसाइटी के पदाधिकारियों का कहना था कि वे पेंशन के मुद्दे पर कुलुगुरु से बात करना चाहते थे। इसके बाद कुलगुरु की तरफ से समिति के पदाधिकारियों खिलाफ भगत की कोठी थाने में एफआईआर दी गई थी। पुलिस ने एफआईआर के आधार पर समिति के पदाधिकारी रामनिवास शर्मा, अशोक व्यास और रामदत्त हर्ष को गिरफ्तार किया था। जिन्हें बाद में कोर्ट से जमानत मिली था।

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