सिरोही जिले में पिंडवाड़ा कस्बे में पुलिस चौकी से मात्र 10 कदम की दूरी पर ओवरलोड जीपों में 55 से 60 यात्री सफर करते हैं। इन वाहनों के खिलाफ पुलिस और परिवहन विभाग की ओर से कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की जा रही है। ये श्रमिक यात्री आसपास के आदिवासी गांवों से आते-जाते हैं। जीपों में क्षमता से कई गुना अधिक यात्री बोनट, छत के करियर पर और यहां तक कि वाहन के किनारों पर लटककर यात्रा करते हैं।
आबू रोड परिवहन विभाग की टीमें कभी-कभार इस मार्ग पर मौजूद रहती हैं, लेकिन उनका ध्यान मुख्य रूप से ट्रकों पर केंद्रित रहता है। ओवरलोड जीप टैक्सियों पर वे कोई कार्रवाई नहीं करते। पुलिस चौकी के इतनी करीब होने के बावजूद, पुलिस विभाग भी इन ओवरलोड वाहनों पर अंकुश लगाने में विफल रहा है। इसी लापरवाही का खामियाजा डेढ़ साल पहले एक सड़क हादसे में 8 लोगों की मौत के रूप में सामने आया था, जिसके पीड़ित परिवार आज भी न्याय का इंतजार कर रहे हैं।
इस संबंध में पुलिस विभाग से बात करने पर उनका कहना है कि ये श्रमिक गरीब हैं और मजदूरी के लिए आते हैं। उनके पास गांव से आने-जाने के लिए इन जीपों के अलावा कोई अन्य उचित साधन नहीं है, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती।


