इटारसी रोड पर मंगलवार तड़के 3 बजे हुए भीषण हादसे में तीन दोस्तों की मौत हो गई, जबकि दो गंभीर घायल हैं। भोपाल में कैब चलाने वाला ऋतिक सोलंकी होली पर घर आया था। रात करीब डेढ़ बजे रामनगर में होलिका दहन के बाद वह अपने चार दोस्तों, वरुण प्रजापति (21), अभय ठाकुर (22), देवा पांडे (32) और आकाश पाल (30) के साथ ढाबे पर खाना खाने गया था। वापसी में बसंत पेट्रोल पंप के पास तेज रफ्तार कार को नियंत्रित करने के लिए ऋतिक ने अचानक हैंड ब्रेक लगा दिया, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़ी क्रेन में जा घुसा। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ऋतिक, वरुण और अभय की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने कटर से कार काटकर शव बाहर निकाले। ऋतिक और अभय अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। शाम को गंज मोक्षधाम में गमगीन माहौल में तीनों का अंतिम संस्कार किया गया। टीआई देवकरण डेहरिया के अनुसार मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। मंजर… दरवाजे तोड़कर निकाले शव टक्कर कार के कंडक्टर साइड से हुई थी, जिससे अगले और पिछले दरवाजे पूरी तरह पिचककर जाम हो गए थे। सूचना पर पहुंची पुलिस और स्थानीय लोगों को शवों और घायलों को बाहर निकालने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। कार के शीशे और लोहे के दरवाजे कटर से काटने पड़े, तब जाकर फंसे हुए युवकों को बाहर निकाला जा सका। आंखों देखी : घायल देवा की जुबानी दोस्त ऋतिक की कार में हम पांचों काका के ढाबे पर गए थे। खाना खाने के बाद लौटते वक्त ऋतिक ने खाली सड़क देख रफ्तार बढ़ा दी। मैं पिछली सीट पर बैठा था। अचानक सामने कुछ आया, जिसे मैं देख नहीं पाया, तभी ऋतिक ने तेज स्पीड में ही हैंड ब्रेक खींच दिया। कार पूरी तरह अनियंत्रित होकर क्रेन से जा टकराई, इसके बाद मुझे कुछ याद नहीं रहा और मैं बेहोश हो गया। अवैध पार्किंग बनी डेथ ट्रैप इटारसी रोड पर क्रेन सर्विस सेंटरों की लापरवाही तीन घरों के चिराग बुझने की बड़ी वजह बनी है। नियम विरुद्ध तरीके से सड़क किनारे खड़ी भारी मशीनों में अक्सर रिफ्लेक्टर नहीं होते, जिससे अंधेरे में ये ‘डेथ ट्रैप’ साबित होती हैं। यहां एक दर्जन से अधिक दुकानें हैं जो रात में क्रेनें सड़क पर ही छोड़ देती हैं। अब सवाल प्रशासन पर है कि क्या इन सर्विस सेंटरों पर कार्रवाई होगी या फिर ऐसे ही हादसे होते रहेंगे?


