स्मार्ट ठगी:नेटवर्क डिवाइस कम लगाईं, ऑटोमेटिक रीडिंग नहीं, अनुमानित बिजली बिल दे रहे

शहर में बिजली कंपनी पिछले 2 साल से स्मार्ट मीटर लगाने का काम कर रही है। कंपनी का दावा था कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद रीडिंग ऑटोमेटिक होगी, जिससे गलती की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद भी लोगों को गलत बिजली बिल दिए जा रहे हैं।
शिकायतों पर पड़ताल में पता चला कि स्मार्ट मीटर हर माह 1 से 3 तारीख के बीच ही ऑटोमेटिक रीडिंग करता है, यदि रीडिंग 3 तारीख के बाद हो रही है तो कंपनी आंकलित खपत के बिल दे रही है। बिजली कंपनी से जुड़े के एक व्यक्ति ने बताया कि स्मार्ट मीटर का नेटवर्क ही कमजोर है। मीटर इंस्टॉलेशन करने वाली कंपनी को जगह-जगह खंभों पर एक नेटवर्किंग डिवाइस लगानी थी, जो तय मात्रा से कम लगाई गईं। यही कारण है कि मीटर ऑटोमेटिक रीडिंग नहीं कर पा रहे हैं। एक समस्या सुधारी तो आंकलित बिल दे दिया तिली क्षेत्र के संजय नगर निवासी कमलेंद्र जाटव ने बताया कि पहले उनके घर पर गलत मीटर इंस्टॉल किया गया। शिकायत पर 5 माह बाद मीटर नंबर बदला, लेकिन बिल सुधार में 10 माह लग गए। दिसंबर माह का मैन्युअल बिल दिया, इसमें खपत 150 यूनिट बताई, अगले माह वही खपत 48 यूनिट बची। कमलेंद्र ने बताया कि स्मार्ट मीटर की ऑटोमेटिक रीडिंग में उनके घर की खपत कभी 100 यूनिट भी नहीं हुई। कंपनी ने यह मनगढंत बिल दिया है। दो माह से शिकायत का समाधान नहीं किया गया गोपालगंज श्रीराम कॉलोनी निवासी फूलसिंह सेन ने बताया कि ऑटोमेटिक रीडिंग होने पर उनका बिजली बिल 20 से 40 यूनिट का आता था। नवंबर माह में 90 यूनिट खपत दर्शाते हुए 1224 रुपए का बिल दिया। बाद में पता चला कि कंपनी ने आंकलित खपत का बिल दिया था। इसके बाद पिछले 2 माह से बिजली कंपनी कार्यालय के चक्कर काट रहा हूं, सुधार नहीं किया जा रहा है। पेनाल्टी के साथ बिल की राशि बढ़ती जा रही है। हर माह 100 से ज्यादा शिकायतें : शिकायत लेकर कंपनी के कार्यालय पहुंचने वाले उपभोक्ताओं को पहले तो इसलिए भटकना पड़ता है कि, उसकी शिकायत किस कक्ष और डेस्क पर सुनी जाएगी। इतने में यदि कंपनी की गलती सामने आ जाए तो जांच और सुधार के नाम पर महीनों निकाल दिए जाते हैं। अधिकारी न तो गलत बिलों में सुधार करते हैं और न ही होल्ड लगाते हैं, जिसके कारण उपभोक्ता के बिल में हर माह पेनाल्टी जुड़ती रहती है। जानकारी के अनुसार शहर संभाग में अकेले हर माह 100 से ज्यादा उपभोक्ता शिकायत दर्ज कराते हैं, जिसमें सबसे ज्यादा गलत बिल संबंधी होती हैं। एक्सपर्ट बोले : 45 दिन में निराकरण करना अनिवार्य वरिष्ठ अधिवक्ता पवन नन्होरिया ने बताया कि यदि उपभोक्ता गलत बिल या अन्य किसी समस्या संबंधी लिखित शिकायत करता है तो, अधिकारी को शिकायत प्राप्त होने से 45 दिन के भीतर उसका निराकरण करना अनिवार्य है। बिल गलत होने पर सुधारकर जारी करना होगा और उपभोक्ता द्वारा यदि अधिक भुगतान किया गया है तो उस राशि को अगले बिल में समायोजित करना होगा। 3 तक होती है ऑटो रीडिंग शहर व मकरोनिया को मिलाकर अभी तक करीब 88 हजार स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। हर माह की 1 से 2-3 तारीख तक ऑटोमेटिक रीडिंग होती है। मीटर नंबर गलत पंच होने या मीटर की इंडेक्सिंग न होने के कारण कई बार मैन्युअल रीडिंग आती है। ऐसे केस सामने आने के बाद उन्हें करेक्ट कर लेते हैं।
– इमरान खान, कार्यपालन अभियंता, शहर संभाग

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