सीमावर्ती जिले जैसलमेर में बुधवार को होली के पावन पर्व पर एक अनूठा और रंगीला नजारा देखने को मिला। अमूमन खाकी वर्दी और सख्त अनुशासन में नजर आने वाली जैसलमेर पुलिस आज मारवाड़ी संस्कृति के रंगों में सराबोर नजर आई। स्थानीय पुलिस लाइन में आयोजित ‘होली स्नेह मिलन’ समारोह में अधिकारियों से लेकर जवानों तक, सभी ने आपसी भेदभाव भुलाकर जमकर गुलाल उड़ाया। राजस्थानी वेशभूषा में सजे पुलिस के ‘सारथी’ इस बार पुलिस की होली खास इसलिए रही क्योंकि अनुशासन की कमान संभालने वाले आला अधिकारी पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में नजर आए। जिला पुलिस अधीक्षक (SP) अभिषेक शिवहरे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) रेवंत दान और प्रवीण कुमार, सीओ रूप सिंह इंदा सहित जिले के सभी थाना प्रभारियों ने सिर पर रंगीन साफा और कुर्ता-पायजामा पहनकर कार्यक्रम में शिरकत की। अधिकारियों का यह पारंपरिक अंदाज देख पुलिस लाइन में मौजूद जवानों का उत्साह दोगुना हो गया। डीजे की धुन पर जमकर लगे ठुमके कार्यक्रम की शुरुआत एक-दूसरे को गुलाल तिलक लगाकर और मुंह मीठा कराकर की गई। इसके बाद डीजे पर जब होली के लोकगीत और धमाकेदार गाने बजे, तो अधिकारी भी खुद को रोक नहीं पाए। एसपी अभिषेक शिवहरे और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने जवानों के साथ कदम से कदम मिलाकर जमकर ठुमके लगाए। पुलिस लाइन परिसर “होली है” के जयकारों और चंग की थाप से गूंज उठा। तनाव कम करने का जरिया है ऐसे आयोजन पुलिसकर्मियों के लिए होली का त्योहार दोहरी खुशी लेकर आता है। दरअसल, मुख्य त्योहार के दिन पुलिसकर्मी आम जनता की सुरक्षा के लिए सड़कों पर तैनात रहते हैं, इसलिए वे अगले दिन अपनी ‘धुलंडी’ मनाते हैं। कड़ी ड्यूटी और मानसिक दबाव के बीच ऐसे आयोजन पुलिसकर्मियों के लिए ‘स्ट्रेस बस्टर’ का काम करते हैं। “जवानों का मनोबल बढ़ाना प्राथमिकता”-एसपी
इस अवसर पर जिला पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे ने जिलेवासियों को होली की बधाई देते हुए कहा: “पुलिस की ड्यूटी चुनौतियों से भरी होती है। अक्सर त्योहारों पर हमारे जवान अपने घर नहीं जा पाते और जनता की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। आज पुलिस परिवार के साथ होली मनाने का उद्देश्य जवानों के तनाव को कम करना और उनमें नई ऊर्जा का संचार करना है। राजस्थानी वेशभूषा हमारी संस्कृति का गौरव है, और आज उसी रंग में रंगकर हमें बेहद खुशी हो रही है। हम सुरक्षित और सद्भावपूर्ण होली का संदेश देते हैं।” मुख्य आकर्षण: परंपरा: अधिकारियों का साफा और कुर्ता पहनकर मारवाड़ी अंदाज में शामिल होना। भाईचारा: कांस्टेबल से लेकर एसपी तक का एक साथ एक ही रंग में रंगे नजर आना। मिठास: गुलाल के साथ पारंपरिक मिठाइयों का दौर चला।


