उदयपुर में आग के बीच कूदे युवक, परम्पराएं बरकरार:बलीचा की होली देखने गुजरात से आए, तलवारों से खेला गैर नृत्य, खेरवाड़ा में धकते कंडों पर दौड़े युवा

युवाओं की टोली हाथों में तलवारों और बंदूकों को लेकर गांवों की गलियों से गुजरती है और होलिका दहन के दौरान वे धधकते कंडों पर दौड़ते है। यह परम्परा उदयपुर जिले के नयागांव और खेरवाड़ा के पास निभाई गई। एक स्थान पर परम्परा और एक जगह तिथि के अनुसार यह आयोजन होता है। नयागांव उपखण्ड के बलीचा गांव में होलिका दहन पूर्णिमा के अगले दिन यानी धुलण्डी पर होता है लेकिन इस बार ग्रहण होने से आज बुधवार को यह आयोजन दोपहर में हुआ।
सुबह से ही इस दहन के लिए आसपास ही नहीं, सीमावर्ती गुजरात के गांवों से भी आदिवासी समाज के लोग एकत्र होना शुरु हो जाते हैं। जब युवाओं की टोली तलवारों और बंदूकों को लेकर गांवों की गलियों से गुजरती हुई आगे फाल्गुन के गीत गाते हुए पहाडिय़ों से उतर कर लोकदेवी के स्थानक के वहां पहुंचती है। समाज के मुखिया, आसपास के मोतबीर, महिलाएं-पुरुष, बच्चे सभी एकत्र होते हैं। फिर शुरु होता है ढोल की थाप पर गैर नृत्य। यह गैर डांडियों के बजाय तलवारों से खेला जाता है। कुछ युवा दोनों हाथ में तलवार लिए होते हैं तो कोई एक हाथ में तलवार और एक हाथ में बंदूक लेकर गैर नृत्य करता है। दोपहर करीब दो बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम के दौरान धधकती होली के बीच खड़े डांडे को तलवार से काटना यहां की परम्परा है। पूर्व उपसरपंच धूलेश्वर वसोहर ने बताया कि इसके लिए युवा प्रयास करना शुरु कर देते हैं। ऐसा नहीं है कि हर कोई यह प्रयास कर ले, क्योंकि यहां ‘माइनस मार्किंग भी है। यदि जीते तो पुरस्कार मिलता है और गलती होती तो मंदिर में सलाखों के पीछे बंद कर दिया जाता है। हालांकि, सजा लम्बी नहीं होती, लेकिन समाज के मुखियाओं द्वारा तय जुर्माना और भविष्य में गलती नहीं करने के वचन पर छोड़ते है। निचला खेरवाड़ा में भी धधकते कंडों पर दौड़े युवा
इधर, उदयपुर जिले के खेरवाड़ा कस्बे के निचला खेरवाड़ा स्थित होली चौक में होलिका दहन के दौरान धधकते कंडों पर दौड़ते युवाओं को देखने क्षेत्रवासियों का हुजूम उमड पड़ा। मंगलवार रात करीब 1.30 होलिका दहन हुआ। इससे पूर्व होली चौक पर आसपास गांवों के लोगों व स्थानीय लोगों का जुटना शुरू हो गया। आसपास गांव व स्थानीय लोगों के द्वारा लाए गए लगभग 1 दर्जन ढोल की थाप पर गैर नृत्य खेला गया। इसके पश्चात शुभ मुहूर्त में होलिका दहन हुआ। बड़ी होली के दहन के दौरान ग्रामीण युवा धधकते कंडो पर दौड़ने लगे। इस दौरान ग्रामीण युवाओं ने जलती होली के बीच खड़े प्रह्लाद रूपी लकड़ी को निकालकर नदी में विसर्जित किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। मान्यता है कि जलती होली में से प्रह्लाद रूपी लकड़ी को निकालकर विसर्जन करने से क्षेत्र में शांति, खुशहाली बनी रहती है। इनपुट : सतवीर सिंह नयागांव और हितेश जोशी खेरवाड़ा

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *