देवास शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित दुर्गापुरा सियापुरा गांव में होली के अवसर पर जलते अंगारों पर चलने की पुरानी परंपरा निभाई गई। मन्नतें पूरी होने पर ग्रामीण, जिनमें महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल थे, धधकते अंगारों पर चले। 50 वर्षों से अधिक समय से चली आ रही इस परंपरा और एक दिवसीय मेले में भाग लेने के लिए आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अंगारों पर चलने की इस परंपरा से पहले गांव में मेघनाथ महाराज की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। ग्रामीणों की गहरी आस्था और मान्यता है कि मन्नत पूरी होने के बाद जब वे इन जलते हुए अंगारों पर चलते हैं, तो उनके पैरों को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचता है। मेले में उमड़ती है कई गांवों की भीड़ होली के अवसर पर गांव में एक दिवसीय मेले का भी आयोजन होता है। इस मेले और अंगारों पर चलने के कार्यक्रम में दुर्गापुरा सियापुरा के अलावा सिन्नी, छोटा मालसापुरा, जनोली, राबड़िया, डूंगरिया, अमरपुरा और बड़ा मालसापुरा सहित कई अन्य गांवों के लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। 50 साल से अधिक समय से कायम है आस्था ग्रामीण राजपाल मालवीय ने इस परंपरा के बारे में बताया कि मेघनाथ महाराज की ‘चूल फिरती है’ और मन्नतें पूरी होने पर महिलाएं अंगारों पर चलती हैं। उन्होंने बताया कि यह मेला और अंगारों पर चलने की परंपरा 50 वर्षों से अधिक समय से चली आ रही है, जिसमें ग्रामीण आज भी पूरी आस्था और उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं।


