होलिका दहन के बाद जलते अंगारों पर चलते हैं ग्रामीण:बालोद में फिर खेलते हैं रंग-गुलाल; मान्यता- शारीरिक कष्ट होते हैं दूर

होली के दिन जहां रंग गुलाल खेलने की परंपरा पूरे देश और दुनिया में निभाई जाती है, वहीं बालोद जिले के डौंडीलोहारा ब्लॉक के ग्राम जाटादाह में रंग गुलाल के साथ अंगारों पर चलने की भी परंपरा अपनाई जाती है। होली की रात पूरे आस्था और रीति रिवाज के साथ गांव में होलिका दहन किया जाता है। जैसे ही होलिका दहन की लकड़ियां अंगारों में तब्दील होती हैं। सुबह करीब 5 बजे से ही गांव के लोग वहां जुटना शुरू हो जाते हैं। कोई हाथ में नारियल और अगरबत्ती लेकर पहुंचता है तो कोई केवल अंगारों में चलने के लिए आता है। लोग अपनी आस्था के अनुसार होलिका की पूजा अर्चना करते हैं और इसके बाद दहकते अंगारों में नंगे पैर चलते हैं। बुधवार को सैंकड़ों ग्रामीणों ने अंगारो पर चलकर यह परंपरा निभाई। इसके बाद रंग-गुलाल खेलकर होली खेला। जाटादाह के शैलेन्द्र सिन्हा ने बताया कि यह परंपरा उनके पूर्वज वर्षो से निभाते आ रहे हैं। मान्यता है कि अंगारों पर चलने से दुख दर्द दूर होते हैं। गांव में यह भी विश्वास है कि यदि कोई व्यक्ति दाद, खाज, खुजली जैसी समस्या से परेशान है तो अंगारों पर चलने से यह समस्या ठीक हो जाती है। ग्रामीण टोडर मल साहू ने बताया कि यह परंपरा कब और किसने शुरू की, इसकी जानकारी किसी को नहीं है, लेकिन पूर्वजों द्वारा शुरू की गई यह परंपरा आज भी जारी है। अंगारों पर चलने की इस प्रथा को देखने के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। वहीं कई लोग अपनी समस्या से छुटकारा पाने की उम्मीद लेकर अंगारों पर चलते हैं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *