राज्य सरकार के 113 नगरीय निकायों के चुनाव टलवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाने के बाद अब पूर्व विधायक संयम लोढ़ा सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। लोढ़ा ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर की हैं। जिसमें उन्होने कहा है कि सरकार की याचिका पर सुनवाई के समय उन्हें भी सुना जाए। पूर्व विधायक ने कहा कि सरकार किसी ना किसी तरह से चुनाव टालना चाहती हैं। जबकि इन निकायों के चुनाव पहले ही देरी से हो रहे हैं। सुनवाई के समय हम सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह पक्ष रखेंगे कि परिसीमन, पुर्नगठन अथवा ओबीसी आयोग का बहाना करके किसी भी हाल में चुनाव टाले नहीं जा सकते हैं। सरकार को निर्देश दिए जाए कि वह चुनाव समय से कवाए। सरकार चुनाव टलवाना चाहती है
राज्य सरकार की ओर से इस मामले को लेकर दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने 113 नगरीय निकायों का परिसीमन रद्द कर दिया, ऐसे में चुनाव कराने के लिए समय बढ़ाया जाए। एसएलपी में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने 309 में से 113 नगरीय निकायों के वार्डों के परिसीमन को सही नहीं माना। इन नगरीय निकायों में वार्डों की संख्या तो नहीं बदली गई थी, लेकिन इनकी आंतरिक सीमाओं को बदल दिया गया था। हाईकोर्ट ने वार्डों की सीमा में बदलाव को रद्द कर दिया था, ऐसे में इनके परिसीमन की नए सिरे से प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय की आवश्यकता है। 15 अप्रैल तक चुनाव के आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर को करीब 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को प्रदेश में 15 अप्रैल तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। वहीं सरकार को 31 दिसंबर तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा था। इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई के समय सुप्रीम कोर्ट ने भी 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के लिए कहा था।


