पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव में अब दो से ज्यादा बच्चे वाले इलेक्शन लड़ सकेंगे। इसकी बाध्यता हटाने के लिए दो अलग-अलग बिल विधानसभा में लाए जाएंगे। विधानसभा में गुरुवार को राजस्थान पंचायतीराज संशोधन बिल-2026 और नगरपालिका संशोधन बिल-2026 रखे जाएंगे। पंचातीराज मंत्री मदन दिलावर पंचायतीराज संशोधन बिल और यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा नगरपालिका संशोधन बिल को सदन में रखेंगे। दोनों बिलों को पारित करवाने की तारीख गुरुवार को विधानसभा की कार्य सलाहकार समिति (BAC) की बैठक में तय होगी। अभी विधानस्भा में 6 मार्च तक का ही कामकाज तय है। ऐसे में बीएसी विधानसभा का कामकाज आगे बढ़ाती है तो दोनों बिल 9 मार्च को पारित करवाए जा सकते हैं। वहीं आगे नहीं बढ़ाने पर 6 मार्च को पारित करवाए जाएंगे। पिछले दिनों 25 फरवरी को कैबिनेट की बैठक में दोनों बिलों को मंजूरी दी गई थी। वर्ष 1995 से तत्कालीन भैरोंसिंह शेखावत सरकार ने पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव में दो से ज्यादा बच्चों वालों पर उम्मीदवार बनने पर रोक लगा दी थी। अब सरकार 31 साल बाद यह बाध्यता का प्रावधान खत्म करने जा रही है। चाहे जितने बच्चो हों पंच-सरपंच, प्रधान, प्रमुख से लेकर पार्षद मेयर तक लड़ सकेंगे चुनाव
दोनों बिल पारित होने के बाद पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनावों में बच्चों की बाध्यता नहीं रहेगी। अभी दो बच्चों से ज्यादा होने पर कोई भी निकाय और पंचायतीराज चुनाव नहीं लड़ सकते। अभी वार्ड पंच, सरपंच, पंचायत समिति मेंबर, जिला परिषद मेंबर, पंचायत समिति प्रधान, जिला प्रमुख, पार्षद, नगर पालिका अध्यक्ष, सभापति और मेयर के चुनाव में दो बच्चों की बाध्यता है। दो से ज्यादा बच्चों वाले अभी ये चुनाव नहीं लड़ सकते। बच्चों की बाध्यता हटाने के लिए दोनों कानूनों में संशोधन के बिल लाए जा रहे हैं। दोनों बिलों में प्रावधान बदलने के बाद अब पंच, सरपंच, प्रधान, प्रमुख से लेकर पार्षद मेयर तक 10 बच्चों वाले नेता भी चुनाव लड़ सकेंगे। बच्चों का प्रावधान लागू और खत्म करने वाली बीजेपी की ही सरकार
तत्कालीन भैरोंसिंह शेखावत के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने वर्ष 1995 में पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव में दो से ज्यादा बच्चों पर उम्मीदवार बनने पर रोक लगाई थी। तब पंचायतीराज और नगरपालिका कानूनों में उम्मीदवारों की योग्यता में दो बच्चों की बाध्यता का प्रावधान लागू किया गया था। वहीं अब मौजूदा बीजेपी सरकार 31 साल बाद दो बच्चों की बाध्यता का प्रावधान खत्म करने जा रही है। पंचायतीराज-निकाय चुनाव में फैसले से बदलेगी स्थानीय सियासत
राजस्थान में शहरी निकाय और पंचायतीराज चुनावों में दो बच्चों की बाध्यता हटने से स्थानीय सियासत पर असर होगा। इसी महीने पंचायतीराज चुनाव की घोषणा होने की संभावना है। अब तक दो से ज्यादा बच्चों वाले जो नेता चुनाव नहीं लड़ पाते थे। इस बार ऐसे नेताओं को मौका मिलेगा। ऐसे में इस बार चुनाव में मकुाबला अधिक कड़ा होगा। …………. ये खबरें भी पढ़ें… 30 साल बाद बदला भैरोंसिंह शेखावत सरकार का फैसला:दो से ज्यादा बच्चों वाले भी लड़ सकेंगे निकाय-पंचायत चुनाव; संशोधन बिलों को कैबिनेट की मंजूरी प्रदेश में अब दो से ज्यादा संतान वाले भी पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनाव लड़ सकेंगे। कैबिनेट की बैठक में भैरोंसिंह शेखावत सरकार का फैसला 30 साल बाद बदल दिया गया है। इससे निकाय और पंचायतीराज की सियासत बदलेगी। कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा- कैबिनेट ने राजस्थान पंचायतीराज संशोधन बिल और राजस्थान नगरपालिका संशोधन बिल 2026 को मंजूरी दे दी है। इन दोनों संशोधनों के बाद दो से ज्यादा बच्चों वालों के निकाय-पंचायत चुनाव लड़ने पर लगी रोक हट जाएगी। (पूरी खबर पढ़ें) राजस्थान- तीन बच्चों वाले भी बन सकेंगे सरपंच-प्रधान और मेयर:अनपढ़ों के निकाय-पंचायत चुनाव लड़ने पर नहीं लगेगी रोक, सरकार का विधानसभा में जवाब पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकायों में अनपढ़ों के चुनाव लड़ने पर सरकार रोक नहीं लगाएगी। निकाय और पंचायत चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य करने का प्रावधान लागू नहीं होगा। (पूरी खबर पढ़ें)


