वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश आचार्य वर्धमान सागर का 10 सालों बाद छठी बार जयपुर नगर के लिए मंगल प्रवेश होने जा रहा है। इस अवसर पर 4 मार्च, बुधवार को आचार्यश्री ने अतिशय क्षेत्र पदमपुरा से शिवदासपुरा की ओर मंगल विहार शुरू किया। इससे पूर्व आचार्य के सान्निध्य में पदमपुरा स्थित भूगर्भ से प्रकट मूलनायक पदमप्रभ भगवान का स्वर्ण कलशों से अभिषेक और शांतिधारा संपन्न हुई। संघ परिवार द्वारा प्रथम कलश से अभिषेक बाल ब्रह्मचारी गज्जू भैया, परमीत, छोटू, राजेश पंचोलिया, बाबूलाल, निर्मल छाबड़ा, समर कंठाली सहित अन्य श्रद्धालुओं ने किया। होली के पर्व के बीच पदमपुरा में भगवान का पंचामृत अभिषेक भी आयोजित हुआ, जिसमें जल, नारियल पानी, दूध, दही, घी, केसर, पुष्प, औषधि, हल्दी, चावल चूर्ण एवं सुगंधित जल जैसे विविध द्रव्यों से सैकड़ों भक्तों ने पुण्यार्जन किया। इस धार्मिक आयोजन में समर कंठाली, दीपक प्रधान, लवीश पंचोलिया, राजेश पंचोलिया, पंडित अशोक सहित अनेक श्रद्धालु शामिल रहे। गुरु भक्तों के अनुसार संघ के आहार उपरांत आचार्य के साथ मुनि हितेंद्रसागर, प्रभवसागर, चिंतन सागर, दर्शितसागर, प्रबुद्ध सागर सहित अनेक मुनिराज, आर्यिकाएं, ऐलक एवं क्षुल्लक सम्मिलित रहे। इस संघ में कुल 10 मुनिराज, 20 आर्यिकाएं, 1 ऐलक, 3 क्षुल्लक और 34 साधु-साध्वियां सहित 35 पीछी सम्मिलित हैं। करीब 2.5 किलोमीटर विहार कर संघ का रात्रि विश्राम अखिल भारतीय मानव कल्याण सेवा आश्रम संस्थान पदमपुरा में हुआ। वहीं 5 मार्च, गुरुवार को सुबह करीब 3.3 किलोमीटर विहार कर शिवदासपुरा स्थित खाटू श्याम कॉलेज में आहार का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस अवसर पर पदमपुरा प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष सुधीर जैन, मंत्री हेमंत सोगानी, राजकुमार कोठारी, सुरेश सबलावत, नरेश पाटनी, राजेश सेठी, महावीर पाटनी सहित जयपुर के अनेक मंदिरों के पदाधिकारियों ने आचार्य से अपने-अपने मंदिरों में मंगल प्रवेश हेतु निवेदन किया। आचार्य वर्धमान सागर के इस मंगल विहार को लेकर पदमपुरा एवं आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।


