राजसमंद के बड़ा भाणुजा गांव में स्थित भगवान लक्ष्मी नारायण मंदिर प्रांगण में पालीवाल ब्राह्मण समाज द्वारा फूलडोल महोत्सव पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अनोखी परंपरा में गांव के सभी पुरुष एक दिन के लिए दूल्हा बनते हैं और पारंपरिक वेशभूषा धारण कर मंदिर पहुंचते हैं। महोत्सव के अवसर पर समाजजन धोती-कुर्ता, माथे पर पाग-साफा और तुरी-कलंगी धारण कर सजे-धजे रूप में दोपहर तक मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। इससे पूर्व गांव में धुलंडी का पर्व भी पारंपरिक रीति-रिवाजों से मनाया गया। समाज के बुजुर्गों ने भगवान लक्ष्मी नारायण को शाही पालकी में विराजमान कर मंदिर के बाहर लाया। इसके बाद सैकड़ों पुरुष पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर गेर नृत्य करते हुए एक-दूसरे से गले मिले और रंगों के इस पावन अवसर पर आपसी मतभेद भुलाकर सौहार्द का संदेश दिया। विशेष बात यह रही कि बड़ा भाणुजा के लोग, जो वर्षभर बाहर रहते हैं, वे भी इस दिन गांव लौटकर परंपरा का निर्वहन करते हैं। आसपास के क्षेत्रों सहित मेवाड़ भर से श्रद्धालु महोत्सव देखने पहुंचे। पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा और मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा।


