जवाहर कला केंद्र की पाक्षिक योजना के तहत मंगलवार को रंगायन सभागार में नाटक ‘मुक्ति’ का मंचन हुआ। यह नाटक कैलाश सोनी द्वारा लिखित व निर्देशित है जिसकी कहानी पिता-पुत्र के रिश्तों की गहराई को छूते हुए नई पीढ़ी की बदलती सोच और प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालती है। बुजुर्ग माता पिता का पुत्र राहुल काफी साल बाद विदेश से लौटता है, वह रात के अंधेरे में दबे पांव अपने घर में प्रवेश करता है। उसके पिता नहीं जानते कि वो उनका पुत्र है, वह उसे चोर समझकर रस्सियों से बांधकर कुर्सी पर बैठा देते हैं और अंदर पलंग पर बीमार मां अपनी आखिरी सांसें गिन रही है। यह मंजर देखकर राहुल यह कह नहीं पाता कि मैं ही आपका पुत्र हूं, वह जरूरत के समय अपने माता-पिता की सेवा नहीं करने के लिए माफी मांगना चाहता है लेकिन अब देर हो चुकी है। इस कहानी में दिखाया गया है कि माता-पिता अपने पुत्र को हर संभव सुख-सुविधा देने का प्रयास करते हैं। वे चाहते हैं कि उनके बेटे को जीवन में किसी चीज की कमी न हो, इसलिए वे उसे उच्च शिक्षा के लिए विदेश भेज देते हैं। लेकिन कम उम्र का पुत्र यह समझ नहीं पाता कि उसे माता-पिता ने इतना दूर क्यों भेजा है। यह दुविधा उसके मन में आक्रोश भर देती है, जिससे उसका परिवार के प्रति लगाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। माता-पिता बच्चों के हित के लिए करते हैं सख्ती विदेश में 10-15 साल बिताने के बाद वह पूरी तरह बदल चुका होता है। उसे अपने पिता से कई शिकायतें होती हैं, वह उन्हें अपना दुश्मन समझने लगता है, जिन्होंने उसे अपने से दूर कर दिया। लेकिन समय के साथ उसे ऐहसास होता है कि उसके पिता की सख्ती सिर्फ उसकी सफलता के लिए थी। यह समझ आते ही वह आत्मग्लानि से भर जाता है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। जिन माता-पिता को उसने गलत समझा था, वे अब इस दुनिया से जा चुके हैं। उसका पछतावा और आंसू अब किसी काम के नहीं हैं। पछतावा ही रह जाता है शेष आखिरकार वह परमात्मा से यह प्रार्थना करता है कि उसे इस दर्द से कभी मुक्ति नहीं मिले। वह चाहता है कि उसका जीवन कभी खत्म न हो क्योंकि अगर जीवन खत्म हो गया तो उसका यह पछतावे का दर्द भी खत्म हो जाएगा। इसलिए वह इसी गम के साथ बिना मुक्ति पाए अपना जीवन जीने की चाह रखता है। नाटक यह संदेश देता है कि माता-पिता की भावनाओं और उनके द्वारा किए गए त्याग को समय रहते समझना जरूरी है। यह कहानी युवाओं को यह सीख देती है कि माता-पिता की सख्ती के पीछे उनका प्रेम और चिंता छुपी होती है। वे हमारी भलाई के लिए ही कठोर निर्णय लेते हैं।


