बड़वानी जिले के अंजड़ नगर में धुलेंडी के दिन सैकड़ों श्रद्धालुओं ने धधकते हुए अंगारों पर नंगे पैर चलकर अपनी श्रद्धा प्रकट की। यह परंपरा वर्षों से ज्वाला माता मंदिर में निभाई जा रही है, जिसे देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी। मान-मन्नत पूरी होने पर जलती ‘चूल’ से गुजरे भक्त गुजराती कोली समाज द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मान्यता है कि ज्वाला माता भक्तों की हर मुराद पूरी करती हैं। धीरेंद्र डावर ने बताया कि जिन लोगों की मन्नत पूरी होती है, वे माता के प्रति आभार जताने के लिए इन अंगारों पर चलते हैं। भक्तों का विश्वास इतना गहरा है कि जलते कोयलों पर चलने के बावजूद उन्हें चोट या जलन का अहसास नहीं होता। 10 फीट लंबे दहकते रास्ते पर चले श्रद्धालु आयोजन की शुरुआत ढोल-नगाड़ों और माता के जयकारों के साथ हुई। मंदिर परिसर में करीब 8 से 10 फीट लंबी ‘चूल’ (अंगारों का रास्ता) तैयार की गई थी। शाम को जब अंगारे पूरी तरह दहक उठे, तब एक-एक कर श्रद्धालु बिना रुके इन पर से दौड़ते हुए निकले। जयकारों के बीच श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। सुरक्षा के बीच हुआ आयोजन संजय तोमर ने बताया कि इस पारंपरिक आयोजन में समाज के वरिष्ठजन और मंदिर समिति के पदाधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। आयोजन के अंत में भव्य प्रसादी बांटी गई। भीड़ को देखते हुए अंजड़ पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे ताकि परंपरा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि उनकी अटूट आस्था का प्रतीक है। देखें तस्वीरें…


