पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दल तैयारियों में जुट गए हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) ने मोगा के किल्ली चाहलां में नशा विरोधी रैली की। अकाली दल प्रधान सुखबीर बादल 40 रैलियां कर रहे हैं। कांग्रेस भी बरनाला में राहुल गांधी की रैली करवा चुकी है। भाजपा 14 मार्च को मोगा में गृहमंत्री अमित शाह की रैली करा रही है। इन सबके बीच बड़ा सवाल ये है कि चुनाव में किस पार्टी की अगुआई कौन करेगा?, यानी इन पार्टियों का CM चेहरा कौन होगा?। खास तौर पर, सत्ताधारी AAP सरकार रिपीट करने किसके भरोसे उतरेगी। अकाली दल 10 साल बाद सत्ता में वापसी के लिए कौन सा चेहरा लाएगी। पिछली बार नवजोत सिद्धू और चरणजीत चन्नी के बीच की लड़ाई में फंसी कांग्रेस इस बार किसे CM चेहरा प्रोजेक्ट करेगी। BJP के पास पंजाब में ज्यादा खोने को नहीं है लेकिन फिर भी किसी एक बड़े नेता को आगे करना है लेकिन किसे करेगी। किस पार्टी में CM चेहरे का कौन दावेदार और पार्टियों की क्या रणनीति, ये जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट… आम आदमी पार्टी: भगवंत मान की फिर चेहरा
आम आदमी पार्टी के लिए पंजाब ही इकलौता स्टेट है, जहां उनकी सरकार चल रही है। ऐसे में पार्टी कोई रिस्क नहीं लेगी। ऐसे में लगता है कि पार्टी CM भगवंत मान को चेहरा बनाकर ही चुनाव लड़ेगी। कुछ समय पहले भी सीएम भगवंत मान को हटाने की अफवाह उड़ी थी। उसके बाद अमृतसर पहुंचे अरविंद केजरीवाल ने साफ कर दिया था कि अगली बार भी मुख्यमंत्री भगवंत मान ही होंगे। इसके अलावा AAP ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक वीडियो डाला था, जिसके जरिए संकेत दिया कि AAP की अगुआई CM भगवंत मान ही करेंगे। AI से बनाए इस वीडियो में पार्टी ने मिशन 2027 के लिए CM भगवंत मान को आगे और उनके पीछे भीड़ चलती दिखाई थी। श्री गुरु ग्रंथ साहब के स्वरूपों के गुम होने के केस, सीएम के श्री अकाल तख्त के सेक्रेटेरिएट में पेश होने जैसे धार्मिक मुद्दों पर विरोधी सरकार को घेर रहे हैं लेकिन राजनीतिक माहिरों का कहना है कि AAP में अभी तक एकतरफा विरोध जैसा कुछ नहीं है। न ही छवि को लेकर सीएम का कोई सीधा नुकसान हुआ है। पार्टी का मानना है कि मान की छवि, फ्री बिजली, महिलाओं को एक हजार रुपए महीना, बस यात्रा, मोहल्ला क्लीनिक जैसी स्कीम वोट बटोरने का काम करेंगे। कांग्रेस के 5 दावेदार लेकिन सबको राहुल गांधी की फटकार
पंजाब कांग्रेस सत्ता विरोधी लहर के सहारे सरकार बनाने की उम्मीद लगाए बैठी है लेकिन CM चेहरा कौन होगा, इसको लेकर स्थिति साफ नहीं है। कांग्रेस में वैसे तो पार्टी के पंजाब प्रधान अमरिंदर राजा वड़िंग, पूर्व CM चरणजीत चन्नी, विधायक दल नेता प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व प्रधान नवजोत सिद्धू, पूर्व डिप्टी CM सुखजिंदर रंधावा और विधायक परगट सिंह दावेदारी ठोक रहे हैं। लेकिन फ्रंट पर बाजवा, वड़िंग और चन्नी ही नजर आते हैं। नवजोत सिद्धू फिलहाल पॉलिटिक्स में एक्टिव नहीं हैं। लेकिन उनकी पत्नी कह चुकी है कि CM चेहरा बनाएंगे तो जरूर चुनाव लड़ने आएंगे। वड़िंग और रंधावा खुद को चीफ मिनिस्ट्री की दौड़ से बाहर कर चुके हैं। हालांकि चरणजीत चन्नी और प्रताप बाजवा अभी भी दावेदारी ठोक रहे हैं। चन्नी दुहाई दे रहे हैं कि उन्हें सिर्फ 3 महीने मिले थे। वहीं बाजवा का तर्क है कि पहले भी वह रेस में रहे। लेकिन पार्टी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को आगे कर दिया। हालांकि इन नेताओं की उम्मीदों पर राहुल गांधी पानी फेर चुके हैं। कुछ दिन पहले बरनाला रैली में राहुल गांधी ने सबको कह दिया कि सब टीम प्लेयर के तौर पर खेलें। उन्होंने कहा- मैं पंजाब कांग्रेस पार्टी नेताओं की पूरी टीम, जो यहां पर बैठी है, सबको मैसेज देना चाहता हूं कि काम टीम वर्क से होता है. एक प्लेयर गेम नहीं जीत सकता। मैं साफ संदेश देना चाहता हूं कि टीम प्लेयर बनो, वरना रिजर्व में बैठा देंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि कांग्रेस सीएम चेहरा नहीं बनाएगी। अकाली दल में सुखबीर बादल ही CM चेहरा
अकाली दल में लगभग स्थिति क्लियर है कि अगर पार्टी सरकार बना पाई तो सुखबीर बादल ही मुख्यमंत्री होंगे। उनकी सांसद पत्नी 4 मार्च की रैली में खुलकर कह भी चुकी हैं कि सुखबीर जी को मुख्यमंत्री बनाओ। अकाली दल पंजाब बचाओ के नाम से 40 रैलियां भी सुखबीर बादल के नाम पर निकाल रहा है। दूसरी बात ये भी है कि अकाली दल में CM चेहरा बादल परिवार से ही बनता है। पिछली बार पार्टी में लीडरशिप चेंज को लेकर खूब हंगामा चला। सुखबीर बादल ने इस्तीफा भी दिया। लेकिन फिर अध्यक्ष भी चुन लिए गए। हालांकि सुखबीर को लेकर अकालियों का बागी धड़ा अभी भी साथ नहीं है। अकाली दल पुनरसुरजीत के नाम से अभी भी नया संगठन काम कर रहा है। यही अकाली दल और सुखबीर बादल की नाराजगी की वजह बना हुआ है। BJP के बड़े चेहरे RSS बैकग्राउंड के नहीं
भाजपा में यूं तो बड़ा पद देते हुए उसका RSS बैकग्राउंड भी देखा जाता है। लेकिन पंजाब में भाजपा की स्थिति बहुत मजबूत नहीं है। पार्टी के 2 बड़े चेहरे प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ और केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू, दोनों कांग्रेस से आए हैं। हालांकि अभी भाजपा के लिए खुलकर वही बैटिंग करते हुए नजर आ रहे हैं। भाजपा वैसे तो किसी को सीएम चेहरा घोषित नहीं करती और अगर कोई पहले दावेदारी ठोकता है तो उसका पत्ता साफ होना तय ही माना जाता है। चर्चा यह भी है कि भाजपा चुनाव में वोट बटोरने के लिए किसी सिख चेहरे को आगे कर सकती है। ऐसे में यह चेहरा कैप्टन अमरिंदर सिंह या रवनीत बिट्टू भी हो सकते हैं। कैप्टन 2 बार पंजाब के सीएम रह चुके हैं। लेकिन अब राजनीतिक हाशिए पर हैं। बिट्टू को जरूर हार के बावजूद भाजपा ने केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया। हालांकि अगर हिंदू चेहरे के तौर पर गए तो पहली पसंद सुनील जाखड़ और दूसरी पसंद पार्टी के वर्किंग प्रधान अश्वनी शर्मा हो सकते हैं। हालांकि भाजपा भी जानती है कि अकेले बलबूते पंजाब में सरकार बनाना उनके लिए दूर की कौड़ी है। ऐसे में शायद ही भाजपा किसी को आगे करे। भाजपा सार्वजनिक अगुआई पर ही फोकस करेगी और चेहरा पीएम नरेंद्र मोदी का ही आगे रखेगी।


