सवाई मानसिंह हॉस्पिटल (SMS) इन दिनों स्थानीय स्तर पर दवाईयों की खरीद का बड़ा खेल चल रहा है। जिन दवाईयों का स्टॉक डीडीसी स्टोर पर उपलब्ध होने के बावजूद फार्मासिस्ट उस दवाई को मरीजों को नहीं दे रहे। मरीज से डॉक्टर की लिखी पर्ची जमा करके अगले दिन या दो दिन बाद आने के लिए कह रहे है, ताकि उस दवाई को स्थानीय स्तर पर महंगी दरों से खरीदा जा सके। दरअसर 4 मार्च को 73 साल का एक मरीज चरक भवन में दिखाने आया और उसे डॉक्टर ने कुछ दवाईयां दी। इनमें से कुछ दवाईयां तो डीसीसी काउंटर से मरीज को दे दी, लेकिन एक-दो दवाई देने से मना कर दिया और बुजुर्ग को 11 नंबर काउंटर (जहां लोकल स्तर पर खरीद करके दवाईयां देते है) पर भेज दिया। जहां उस बुजुर्ग मरीज को पहले तो पर्ची और आईडी कार्ड की फोटो कॉपी लाने के लिए बाजार भेजा गया। इसके बाद जब मरीज वापस लौटा तो वहां मौजूद फार्मासिस्ट अजीत सिंह चौधरी ने फोटो कॉपी जमा करके मरीज को 2 दिन बाद आने के लिए बोल दिया। पता चला ज्यादातर मरीजों से ऐसा ही किया गया। उनकी डॉक्टर की लिखी पर्चियों को जमा करके किसी को एक दिन तो किसी को दो दिन बाद आकर दवाई लेने के लिए कहा। दवाईयां स्टॉक में, फिर भी लोकल खरीद बुजुर्ग मरीज को चर्म रोग से जुड़ी जो दवाईयां लेने के लिए काउंटर नंबर 11 पर भेजा गया, उसका स्टॉक ऑनलाइन IHMS पोर्टल पर दर्शा रहा था। 70 से ज्यादा मात्रा में उक्त दवाई एसएमएस के अलग-अलग डीडीसी काउंटर पर रखी थी। इसके बावजूद मरीज को उन डीडीसी काउंटर से दवाई मंगवाकर देने के बजाए दो दिन बाद आने के लिए कहा दिया। 4 घंटे के अंदर खरीद करके देने का आदेश दवाईयां का स्टॉक नहीं होने पर डीडीसी काउंटर 11 पर आने वाले मरीजों को 4 घंटे के अंदर स्थानीय स्तर से दवाईयां खरीद करके देने का प्रावधान स्वयं SMS हॉस्पिटल प्रशासन ने कर रखा है। इस कारण दवाईयों की खरीद के पहले से ही टेंडर करके रेट कॉन्ट्रेक्ट फिक्स कर रखे है। ताकि दवाईयां खत्म होने पर विक्रेता से उन फिक्स किए गए रेट पर दवाईयां तुरंत मंगवाकर मरीज को दी जा सके। मॉनिटरिंग की कमी, मरीजों की भी कोई सुनने वाला नहीं
सरकारी हॉस्पिटलों में पहले से ही दवाईयों की किल्लत से मरीज परेशान है। मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत सरकारी स्तर पर दवाई खरीद करने वाली एजेंसी RMSCL पहले ही दवाईयों का पर्याप्त स्टॉक हॉस्पिटल में नहीं भेज पा रहा है। ऐसे में सैंकड स्तर पर लोकल स्तर पर दवाई खरीद का सिस्टम विकसित किया था, ताकि मरीजों को परेशानी न हो। लेकिन जिम्मेदार मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज और संबंधित अधिकारियों की पर्याप्त मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण ये व्यवस्था भी एसएमएस में फेल हो रही है। वहीं इस मामले में मरीजों की सुनवाई भी करने वाला कोई नहीं।


