ग्वालियर में 77 करोड़ का बस टर्मिनल शोपीस बना:उद्घाटन के महीनों बाद भी वीरान, बस ऑपरेटर नहीं पहुंच रहे

ग्वालियर में 77 करोड़ रुपए की लागत से बना इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) उद्घाटन के कई महीनों बाद भी संचालित होना तो दूर महज शोपीस बनकर रह गया है। और शहरवासियों को आधुनिक सुविधाओं से लैस बस अड्डे की सौगात देने का दावा फिलहाल अधूरा नजर आ रहा है। एयरपोर्ट की तर्ज पर तैयार किए गए इस आईएसबीटी से शुरुआत में ग्वालियर–मुरैना–भिंड रूट की बसों का संचालन शुरू किया गया था और प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसका विधिवत उद्घाटन भी किया था। शुरुआती कुछ दिनों तक बसों की आवाजाही रही, लेकिन बाद में निजी बस ऑपरेटरों ने यहां से संचालन बंद कर पुराने बस अड्डे से ही बसें चलाना शुरू कर दिया। एक ही स्थान के लिए मिलेंगी बसें दरअसल, आईएसबीटी को इस सोच के साथ विकसित किया गया था कि ग्वालियर, भिंड और मुरैना के साथ-साथ गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों के बड़े शहरों के लिए एक ही स्थान से सीधी बस सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। यात्रियों को आधुनिक प्रतीक्षालय, पार्किंग, टिकट काउंटर और अन्य सुविधाएं देने के उद्देश्य से यह परियोजना तैयार की गई थी। लेकिन वर्तमान स्थिति में यह बस टर्मिनल वीरान पड़ा है और यात्रियों को अब भी शहर के अलग-अलग बस स्टैंड से सफर करना पड़ रहा है। यात्रियों के लिए दूरी अधिक निजी बस ऑपरेटरों का कहना है कि आईएसबीटी शहर से लगभग 9 किलोमीटर दूर स्थित है, जिससे यात्रियों को अतिरिक्त परेशानी और खर्च का सामना करना पड़ेगा। बस ऑपरेटर यूनियन के उपाध्यक्ष प्रेम नारायण भटेले के अनुसार, पहले बस स्टैंड कंपू क्षेत्र में था, फिर इसे रेलवे स्टेशन के पास शिफ्ट किया गया ताकि यात्रियों को ट्रेन और बस के बीच आसानी से आवाजाही मिल सके। उनका तर्क है कि देश के अधिकांश शहरों में बस अड्डे और रेलवे स्टेशन पास-पास होते हैं, जिससे यात्रियों को सुविधा रहती है। यात्री किराए पर पड़ेगा असर भटेले का कहना है कि नया आईएसबीटी शहर के बाहरी हिस्से में बनाए जाने से यात्रियों को रात के समय विशेष दिक्कत होगी, खासकर महिलाओं और बच्चों के साथ सफर करने वालों को। यदि यात्री निजी ऑटो से आईएसबीटी पहुंचते हैं तो उन्हें 100 से 200 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। इसके बाद भिंड या मुरैना का बस किराया अलग से देना होगा, जिससे कुल यात्रा महंगी पड़ जाएगी। बनाने से पहले नहीं की चर्चा बस ऑपरेटर पदम गुप्ता का कहना है कि संभवतः ट्रैफिक कम करने की मंशा से नया बस अड्डा शहर के एक छोर पर बनाया गया, लेकिन इससे उल्टा असर हो सकता है। शहर के दूसरे छोर से आने वाले लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। उनका कहना है कि प्रशासन ने नया बस स्टैंड बनाने से पहले बस ऑपरेटरों से पर्याप्त चर्चा नहीं की। यदि पहले ही सार्वजनिक परिवहन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाती, तो शायद स्थिति अलग होती। बैठक में करेंगे चर्चा
हालांकि प्रशासन का पक्ष अलग है। जिला परिवहन अधिकारी विक्रमजीत सिंह कंग का कहना है कि पहले आईएसबीटी से बसों का संचालन शुरू हुआ था, लेकिन बाद में निजी ऑपरेटरों ने वहां जाने से इनकार कर दिया। इस मुद्दे पर बस ऑपरेटर यूनियन के साथ एक बैठक हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल पाया। अब कलेक्टर की अध्यक्षता में जल्द ही एक और बैठक प्रस्तावित है, जिसमें समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। जल्दी ही शुरू करेंगे ई–बस ग्वालियर कलेक्टर रुचिका सिंह कि माने तो शहर में जल्द ही ई-बस सेवा शुरू करने की योजना है, जिससे आईएसबीटी तक सुगम और सस्ती सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। यदि ऐसा होता है, तो संभव है कि निजी बस ऑपरेटर भी वहां से संचालन पर सहमत हो जाएं। फिलहाल करोड़ों की लागत से बना आधुनिक आईएसबीटी अपने उद्देश्य की पूर्ति का इंतजार कर रहा है। शहरवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन और बस ऑपरेटरों के बीच समन्वय स्थापित कर जल्द ही इस परियोजना को पूरी तरह चालू किया जाएगा, ताकि जनता को वास्तविक सुविधा मिल सके और करोड़ों रुपये का निवेश सही मायने में सामने आए।

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