शाजापुर के प्रमुख जलस्रोत गिरवर तालाब के कायाकल्प की योजना अभी तक कागजों तक ही सीमित है। साल 2021 में इसे वेटलैंड झील परियोजना के तहत चुना गया था। इसके विकास के लिए 2023 में 6 करोड़ 67 लाख रुपए की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर भोपाल भेजी गई थी। डीपीआर को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी राशि जारी नहीं हुई है। इस कारण तालाब के विकास का काम शुरू नहीं हो पाया है। उपेक्षा से गिरवर तालाब का अस्तित्व संकट में गिरवर तालाब शाजापुर नगर के कई इलाकों के लिए एक महत्वपूर्ण जलस्रोत है। इसमें पानी भरा रहने से आसपास के कुएं और बोरिंग रिचार्ज होते हैं। हालांकि, लगातार उपेक्षा के कारण इसका अस्तित्व खतरे में है। विभिन्न नालों का गंदा पानी इसमें मिलने से जल प्रदूषित हो रहा है। इसके अतिरिक्त, अवैध रूप से पानी की निकासी के कारण तालाब कई बार सूखने की स्थिति में पहुँच जाता है। डीपीआर में तालाब के गहरीकरण, बाउंड्रीवाल निर्माण, तट पर पार्क, वॉकिंग ट्रैक, लाइटिंग, चौपाटी और बोटिंग जैसी सुविधाओं को विकसित करने का प्रस्ताव है। इसका मुख्य उद्देश्य इसे एक आकर्षक पिकनिक स्पॉट के रूप में बदलना था। हालांकि, अभी तक धरातल पर कोई भी कार्य शुरू नहीं हो सका है। विकास के लिए अतिक्रमणों हटाना अनिवार्य तालाब क्षेत्र में अतिक्रमण भी एक बड़ी समस्या है। पूर्ण विकास के लिए सबसे पहले अतिक्रमणों को चिन्हित कर हटाना आवश्यक होगा। नगर पालिका सीएमओ भूपेंद्र कुमार दीक्षित के अनुसार, राशि प्राप्त होते ही विकास कार्य शुरू किए जाएंगे। नगरवासी गिरवर तालाब के कायाकल्प का इंतजार कर रहे हैं।


